R Praggnanandhaa ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी Magnus Carlsen को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर ने क्लासिकल मुकाबले में शानदार खेल दिखाते हुए कार्लसन को मात दी और तीन अहम अंक अपने नाम किए। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा 4.5 अंकों के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।
यह दूसरी बार है जब R Praggnanandhaa ने नॉर्वे चेस में क्लासिकल फॉर्मेट में Magnus Carlsen को हराया है। इससे पहले 2024 में भी उन्होंने पूर्व विश्व चैंपियन को मात देकर सबको चौंका दिया था। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि मुकाबला बेहद करीबी था और टाइम स्क्रैम्बल के दौरान नतीजा किसी भी तरफ जा सकता था।
सात बार के चैंपियन कार्लसन इस समय टूर्नामेंट में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। छह खिलाड़ियों की अंक तालिका में उनके सिर्फ 1.5 अंक हैं और वह सबसे नीचे चल रहे हैं।
दूसरी ओर मौजूदा विश्व चैंपियन D Gukesh की खराब फॉर्म जारी रही। फ्रांस के Alireza Firouzja ने उन्हें आर्मगेडन मुकाबले में हराकर 1.5 अंक हासिल किए। करीब पांच घंटे तक चला क्लासिकल मैच ड्रॉ रहा, लेकिन टाईब्रेकर आर्मगेडन में फिरोजा ने बाजी मार ली।
दिलचस्प बात यह रही कि चोटिल होने के बावजूद Alireza Firouzja शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। मैच के बाद वह व्हीलचेयर और मून बूट में नजर आए। लगातार जीत के साथ उन्होंने 7.5 अंकों के साथ टूर्नामेंट में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। वहीं D Gukesh 3.5 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं। अगले दौर में उनका मुकाबला अब मैग्नस कार्लसन से होगा, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
महिला वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। Divya Deshmukh ने टूर्नामेंट लीडर Bibisara Assaubayeva को आर्मगेडन में हराकर तीसरी टाइब्रेकर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ दिव्या 4.5 अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं।
वहीं भारत की अनुभवी खिलाड़ी Koneru Humpy को Anna Muzychuk के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हम्पी फिलहाल दो अंकों के साथ आखिरी स्थान पर हैं।
चेस में आर्मगेडन मुकाबला एक तरह का ‘सडन डेथ’ टाईब्रेकर होता है, जहां ड्रॉ की कोई गुंजाइश नहीं रहती। अगर क्लासिकल मुकाबला बराबरी पर खत्म होता है तो विजेता तय करने के लिए यह फॉर्मेट खेला जाता है।
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बार दुनिया भर का ध्यान खींच रहा है। खासकर प्रज्ञानानंदा की जीत ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर्स अब विश्व चेस पर अपना दबदबा लगातार मजबूत कर रहे हैं।