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छत्तीसगढ़ में गर्मी का कहर, हीटवेव से मर रहे चमगादड़; पेड़ों पर पानी छिड़क रहा वन विभाग

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छत्तीसगढ़ इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे इंसानों के साथ-साथ वन्यजीव भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई इलाकों में चमगादड़, मोर और दूसरे वन्यजीवों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन तक प्रदेश में झुलसाने वाली गर्मी बनी रह सकती है। रायपुर समेत मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत भी मिले हैं और 29 मई से आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

पिछले 24 घंटे में दुर्ग प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 26 डिग्री दर्ज हुआ। राजधानी रायपुर में भी आज तापमान 45 डिग्री के आसपास रहने की संभावना जताई गई है।

भीषण गर्मी का असर अब जंगलों और वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में सैकड़ों चमगादड़ों की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए वन विभाग पेड़ों पर पानी का छिड़काव कर रहा है ताकि आसपास का तापमान कम किया जा सके और बाकी जीवों को बचाया जा सके।

इसी तरह कांकेर जिले के सरोना इलाके में भी हीटवेव के कारण बड़ी संख्या में चमगादड़ों के मरने की खबर सामने आई है। वहीं खैरागढ़ के दल्लीखोली-लछना जंगल में लू की वजह से मोर और सिवेट जैसे वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई है।

बुधवार को मौसम का असर राजधानी रायपुर में भी देखने को मिला, जहां अचानक आई तेज आंधी के कारण देवपुरी इलाके में बिजली का पोल गिर गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से ओडिशा तक ट्रफ लाइन और बिहार से तेलंगाना तक उत्तर-दक्षिण ट्रफ बनी हुई है। इसी वजह से आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलेगी।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि रबी मक्का, केला और पपीता जैसी फसलों में हल्की सिंचाई करें ताकि तेज गर्मी से फसल को नुकसान न पहुंचे। साथ ही गेहूं और चना की कटाई जल्द पूरी कर उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने को कहा गया है।

हीटवेव की इस स्थिति ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के खतरे को उजागर कर दिया है। इंसानों के साथ-साथ अब वन्यजीव भी इस भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं।

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