सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 को लेकर देशभर में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी के बीच अब CBSE ने री-इवैल्यूएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुक्रवार 29 मई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में छात्र अपनी कॉपियों की दोबारा जांच के लिए आवेदन कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक अब तक 4 लाख से ज्यादा छात्र री-चेकिंग के लिए आवेदन कर चुके हैं, जबकि 11 लाख से ज्यादा आंसर शीट की मांग की गई है। रिजल्ट में कथित गड़बड़ियों और नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
इस बार CBSE ने पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम लागू किया था। इसके तहत परीक्षकों को छात्रों की स्कैन की हुई डिजिटल कॉपियां स्क्रीन पर जांचनी थीं। बोर्ड का दावा था कि इससे जांच प्रक्रिया तेज और ज्यादा पारदर्शी होगी, लेकिन रिजल्ट आने के बाद यह सिस्टम विवादों में घिर गया।
कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी कॉपियों के सवाल बिना जांचे छोड़ दिए गए। सोशल मीडिया पर छात्रों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि उम्मीद से बेहद कम नंबर दिए गए हैं। वहीं जब छात्र अपनी कॉपियां देखने के लिए पोर्टल पर पहुंचे तो वेबसाइट बार-बार क्रैश होने लगी, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं, लेकिन अनुमान है कि लगभग 20 प्रतिशत छात्र ही अंतिम रूप से री-इवैल्यूएशन का विकल्प चुनेंगे।
CBSE ने फीस को लेकर भी जानकारी दी है। मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए छात्रों को 100 रुपये फीस देनी होगी। वहीं किसी विशेष प्रश्न की दोबारा जांच करवाने के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये शुल्क देना होगा। खास बात यह है कि अगर किसी छात्र का एक भी नंबर बढ़ता है तो पूरी फीस वापस कर दी जाएगी। हालांकि बोर्ड ने साफ किया है कि री-चेकिंग के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं।
री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Post Result Services’ सेक्शन में लॉग इन करना होगा। इसके बाद रोल नंबर और एडमिट कार्ड ID डालकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केवल वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने पहले अपनी स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली है।
अब इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CBSE का नया डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम छात्रों का भरोसा वापस जीत पाएगा, या फिर आने वाले समय में बोर्ड को अपनी प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे।