शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में ऐसा उतार-चढ़ाव देखने को मिला जिसने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दीं। कारोबार के आखिरी आधे घंटे में अचानक भारी बिकवाली शुरू हुई और बीएसई सेंसेक्स महज 10 मिनट के भीतर करीब 850 अंक तक लुढ़क गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह MSCI रीबैलेंसिंग रही, जिसने कई बड़े शेयरों में जबरदस्त खरीदारी और बिकवाली का दबाव पैदा कर दिया।
दरअसल ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI ने अपने ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में बदलाव लागू किए हैं। इस बदलाव के तहत चार भारतीय कंपनियों को इंडेक्स में जगह मिली, जबकि चार कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इंडेक्स में शामिल होने वाली कंपनियों में फेडरल बैंक, एमसीएक्स, नाल्को और इंडियन बैंक शामिल हैं। दूसरी तरफ हुंडई मोटर इंडिया, जुबिलेंट फूडवर्क्स, कल्याण ज्वेलर्स और रेल विकास निगम लिमिटेड को इंडेक्स से बाहर कर दिया गया।
MSCI इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े विदेशी फंड बेहद गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि जैसे ही किसी कंपनी की इंडेक्स में एंट्री होती है, उसमें विदेशी निवेश बढ़ने लगता है। वहीं बाहर होने वाली कंपनियों में बड़े स्तर पर बिकवाली शुरू हो जाती है। शुक्रवार को बाजार में यही असर साफ दिखाई दिया।
दोपहर 3 बजे तक बाजार सामान्य तरीके से कारोबार कर रहा था और सेंसेक्स 75,529 के आसपास था। लेकिन कुछ ही मिनटों में बिकवाली इतनी तेज हुई कि सेंसेक्स फिसलकर 74,685 तक पहुंच गया। आखिर में सेंसेक्स 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी-50 भी 1.5 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ।
ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक MSCI रीबैलेंसिंग के चलते बाजार से करीब 8,000 करोड़ रुपये का आउटफ्लो देखने को मिला। रिसर्च फर्म नुवामा का अनुमान है कि फेडरल बैंक में करीब 491 मिलियन डॉलर, MCX में 373 मिलियन डॉलर और नाल्को में 308 मिलियन डॉलर तक का नया विदेशी निवेश आ सकता है। दूसरी ओर जिन कंपनियों को इंडेक्स से बाहर किया गया है, उनमें भारी बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
इसके अलावा अडानी पावर, भारत पेट्रोलियम और ट्रेंट जैसे शेयरों का वेटेज बढ़ने से उनमें निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं कुछ बड़ी कंपनियों का वेटेज घटने से आने वाले दिनों में उन पर दबाव देखने को मिल सकता है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि अगले हफ्ते बाजार इस झटके से कितनी जल्दी उबर पाता है और विदेशी निवेशकों का रुख किस दिशा में जाता है।