रायपुर – छत्तीसगढ़ सरकार ने गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी राजस्व के पंचायतों में वितरण और उसके उपयोग को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। खनिज साधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब गौण खनिजों से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा सीधे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा, जबकि शेष राशि का बंटवारा ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत के बीच निर्धारित स्लैब के आधार पर किया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लाग हो गया है।
सरकार ने 10 अक्टूबर 2012 को जारी पुराने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए यह नई व्यवस्था लागू की है। आदेश के मुताबिक छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत पूर्ववत वित्तीय वर्ष में गौण खनिजों से प्राप्त कुल राजस्व का 33 प्रतिशत हिस्सा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दिया जाएगा। इसके बाद शेष 67 प्रतिशत राशि का वितरण संबंधित पंचायत संस्थाओं के बीच किया जाएगा।
अब इस हिसाब से होगा राशि का बंटवारा
नई व्यवस्था के तहत जिन क्षेत्रों में गौण खनिज से प्राप्त राशि 7.50 लाख रुपये तक होगी, वहां पूरी राशि ग्राम पंचायत को मिलेगी। 7.50 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 80 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 10-10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। इसी प्रकार 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 70 प्रतिशत और जनपद व जिला पंचायत को 15-15 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। 25 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक की राशि पर ग्राम पंचायत का हिस्सा 60 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत का हिस्सा 20-20 प्रतिशत रहेगा। वहीं 50 लाख रुपये से अधिक की राशि होने पर ग्राम पंचायत को 50 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 25-25 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।
स्कूलों, अस्पतालों और श्मशान घाटों पर खर्च की अनुमति
सरकार ने पंचायतों को मिलने वाली राशि के उपयोग के लिए कुछ नए कार्य भी शामिल किए हैं। अब इस राशि से स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में ओवरहेड टैंक सहित रनिंग वाटर की सुविधा विकसित की जा सकेगी। सामुदायिक शौचालयों में पानी की व्यवस्था, मुक्तिधाम निर्माण एवं संधारण, वहां तक पहुंच मार्ग का निर्माण तथा वाचनालयों की स्थापना जैसे कार्य भी इस मद से किए जा सकेंगे।
खदान प्रभावित इलाकों में ही खर्च होगी जिला पंचायत की राशि
नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिला पंचायत को मिलने वाली राशि का उपयोग केवल उन्हीं क्षेत्रों के विकास कार्यों में किया जाएगा जहां खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके लिए क्षेत्र खनन स्थल से 15 किलोमीटर की परिधि के भीतर होना चाहिए और वहां खनन के प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हों। इससे खदान प्रभावित गांवों और बस्तियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
2022-23 से लागू मानी जाएगी नई व्यवस्था
आदेश में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 और उससे पूर्व की अवधि में वितरित राशि का उपयोग पुराने आदेश के अनुसार ही किया जाएगा। हालांकि वित्तीय वर्ष 2022-23 और उसके बाद प्राप्त होने वाली गौण खनिज राजस्व राशि का वितरण और व्यय नई व्यवस्था के तहत किया जाएगा। पुराने आदेश के अन्य प्रावधान यथावत बने रहेंगे। खनिज साधन विभाग का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास कार्यों को लेकर लगातार मांग उठती रही है। नई व्यवस्था के जरिए सरकार ने राजस्व के उपयोग को अधिक लक्षित बनाते हुए खदान प्रभावित क्षेत्रों तक विकास का लाभ पहुंचाने की कोशिश की है।