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1 जून से बदले कई नियम, महंगा हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर; UPI और सोलर पैनल पर भी नए बदलाव लागू

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जून महीने की शुरुआत के साथ देशभर में आम लोगों और कारोबारियों से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। सबसे बड़ा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला है। तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 53.50 रुपए तक बढ़ा दिए हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ने वाली है।

नई दरों के अनुसार दिल्ली में कमर्शियल LPG सिलेंडर अब 3113.50 रुपए में मिलेगा, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 3255.50 रुपए पहुंच गई है। मुंबई में यह सिलेंडर 3067.50 रुपए और चेन्नई में 3283 रुपए का हो गया है। गैस की बढ़ती कीमतों का असर आने वाले दिनों में बाहर खाने-पीने की चीजों पर भी देखने को मिल सकता है। रेस्टोरेंट, ढाबे और कैटरिंग सेवाएं महंगी होने की आशंका जताई जा रही है।

इसके साथ ही 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG यानी छोटू सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत 821.50 रुपए हो गई है। यह सिलेंडर खासतौर पर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और छोटे दुकानदारों के बीच काफी लोकप्रिय है, क्योंकि इसे बिना एड्रेस प्रूफ के खरीदा जा सकता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दूसरा बड़ा बदलाव पेट्रोलियम सेक्टर में हुआ है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर दी है। नई दरों के मुताबिक पेट्रोल पर 1.5 रुपए प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपए प्रति लीटर और ATF पर 9.5 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी लागू होगी। सरकार के इस फैसले से तेल रिफाइनरी कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

बैंकिंग सेक्टर में भी बड़ा बदलाव हुआ है। HDFC Bank ने छोटे UPI ट्रांजैक्शन पर SMS अलर्ट बंद करने का फैसला लिया है। अब 100 रुपए से ज्यादा पैसे भेजने या 500 रुपए से ज्यादा पैसे मिलने पर ही SMS नोटिफिकेशन आएगा। छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन पर लगातार आने वाले मैसेज से परेशान ग्राहकों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा सरकार ने सब्सिडी वाले रूफटॉप सोलर पैनल प्रोजेक्ट्स के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। अब सिर्फ सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनियों के सोलर पैनलों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे घरेलू स्तर पर बने प्रमाणित सोलर पैनलों की मांग बढ़ सकती है। शुरुआती लागत बढ़ने की संभावना जरूर है, लेकिन उपभोक्ताओं को बेहतर क्वालिटी और सुरक्षित सोलर सिस्टम का फायदा मिलेगा।

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