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RBI की अहम बैठक आज से शुरू, क्या फिर बदलेगा लोन और EMI का खेल? रेपो रेट पर टिकी देशभर की नजरें

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देशभर के करोड़ों लोगों की नजरें एक बार फिर भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर टिक गई हैं। 3 जून से शुरू हो रही यह अहम बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद RBI देश की ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाएगा। फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर बनी हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है।

हालांकि पिछले साल RBI ने लगातार राहत देने वाले फैसले लिए थे। फरवरी 2025 में करीब पांच साल बाद पहली बार रेपो रेट में कटौती करते हुए इसे 6.5% से घटाकर 6.25% किया गया था। इसके बाद अप्रैल में भी 0.25% की कमी की गई। जून में RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए दरों में 0.50% की कटौती की, जबकि दिसंबर में एक और 0.25% की राहत के बाद रेपो रेट 5.25% तक पहुंच गई। अब सवाल यही है कि क्या RBI आगे भी राहत देगा या फिलहाल ब्रेक लगाएगा।

असल में रेपो रेट वही दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है और उसका फायदा आम लोगों तक पहुंचता है। होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरें कम होने लगती हैं, जिससे EMI घट सकती है। वहीं दूसरी तरफ जब महंगाई तेजी से बढ़ती है, तब RBI रेपो रेट बढ़ाकर बाजार में पैसे के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए RBI बेहद सतर्क रुख अपनाना चाहता है। यही वजह है कि इस बार ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि निवेशकों, कारोबारियों और आम लोन धारकों की उम्मीदें अब भी बनी हुई हैं।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल 6 सदस्य शामिल होते हैं। इनमें तीन सदस्य RBI के होते हैं, जबकि बाकी तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। यह समिति हर दो महीने में बैठक करती है और देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, बाजार और विकास दर जैसे कई अहम पहलुओं का विश्लेषण करने के बाद फैसला लेती है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RBI पहले ही अपनी बैठकों का पूरा शेड्यूल जारी कर चुका है। अप्रैल में पहली बैठक हो चुकी थी और अब जून की यह दूसरी बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासकर ऐसे समय में जब बाजार, बैंकिंग सेक्टर और आम जनता सभी यह जानना चाहते हैं कि आने वाले महीनों में EMI का बोझ बढ़ेगा या राहत मिलेगी।

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