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भारत पर अमेरिका का बड़ा दबाव! 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी, ट्रेड डील पर बढ़ा तनाव

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भारत और अमेरिका के बीच चल रही अहम ट्रेड डील बातचीत के बीच अब एक नई चुनौती सामने आ गई है। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी सूची में शामिल किया है, जिन पर जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया है। इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने इन देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी USTR की रिपोर्ट के अनुसार भारत में “फोर्स्ड लेबर” यानी जबरन श्रम से बने सामानों को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है। अमेरिका का दावा है कि ऐसी परिस्थितियां अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा पैदा करती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों में नियमों को आंशिक रूप से लागू किया गया है या जो भविष्य में सुधार का भरोसा दे रहे हैं, उनके सामानों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। वहीं जिन देशों में अमेरिका को सुधार की कोई ठोस तैयारी नहीं दिख रही, उनके सामानों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि एंबेसडर जेमिसन ग्रीर ने इस मुद्दे पर सख्त बयान देते हुए कहा कि अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर रोक न लगाने को स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिका इस रिपोर्ट के आधार पर आगे व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है।

यह पूरा मामला अमेरिका के “सेक्शन 301” कानून के तहत चलाया जा रहा है। यह अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 का एक विशेष प्रावधान है, जिसके जरिए अमेरिकी प्रशासन किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सकता है। अगर जांच में कोई देश अमेरिकी हितों के खिलाफ पाया जाता है, तो अमेरिका उस देश पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है।

भारत के अलावा इस सूची में चीन, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड जैसे कई बड़े देश भी शामिल हैं। वहीं कनाडा, यूरोपीय संघ, मैक्सिको, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं को भी कानून लागू करने में कमजोर माना गया है।

इस घोषणा का समय भारत के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। दरअसल अमेरिकी व्यापार अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस समय नई दिल्ली में मौजूद है, जहां दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA पर बातचीत चल रही है। पिछले करीब 15 महीनों से दोनों देश इस डील के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल हाल ही में कह चुके हैं कि बातचीत का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब केवल छोटे तकनीकी मुद्दों पर चर्चा चल रही है। हालांकि अमेरिकी रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस डील पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वास्तव में अतिरिक्त 10 से 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है, तो भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर टेक्सटाइल, स्टील, एल्युमिनियम, प्रोसेस्ड फूड और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

इतना ही नहीं, भारत इस समय अमेरिका की एक और “सेक्शन 301” जांच का सामना कर रहा है, जो सोलर मॉड्यूल, स्टील और अन्य सेक्टर्स में अत्यधिक उत्पादन क्षमता से जुड़ी हुई है। यानी आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है।

फिलहाल सबकी नजर नई दिल्ली में चल रही बातचीत पर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इस नए विवाद के बीच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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