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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: भ्रष्टाचार मामलों में 45 दिन में देनी होगी अभियोजन स्वीकृति, 90 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

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छत्तीसगढ़ सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में अभियोजन स्वीकृति देने की प्रक्रिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि किसी मामले में नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी को यह प्रतीत होता है कि अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, तो उसे आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर अभियोजन स्वीकृति जारी करनी होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अनावश्यक देरी न हो और जांच एजेंसियों को समय पर कानूनी कार्रवाई करने का अवसर मिले।

यदि किसी मामले में नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी अभियोजन स्वीकृति देने से सहमत नहीं होता है, तो उसे अपनी असहमति के स्पष्ट और ठोस कारण दर्ज करते हुए मामला विधि विभाग को भेजना होगा। इसके बाद विधि विभाग मामले का परीक्षण करेगा और आवश्यक अभिमत देगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। इससे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को निश्चित समय सीमा में बांधा जा सकेगा।

राज्य सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों से संबंधित मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था निर्धारित की है। ऐसे मामलों में विधि विभाग संबंधित प्रशासनिक विभाग के अभिमत का परीक्षण करेगा और आवश्यक समन्वय के बाद अंतिम आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मामलों में भी स्पष्टता और पारदर्शिता बनी रहेगी।

नए निर्देशों में आउटसोर्स कर्मचारियों और मानदेय आधारित कर्मियों को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। सरकार ने कहा है कि चूंकि इन कर्मचारियों का नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी सीधे राज्य सरकार या कोई सरकारी निकाय नहीं होता, इसलिए इनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां सीधे अभियोजन की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगी।

सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत अभियोजन स्वीकृति से संबंधित आदेशों को लोक दस्तावेज (Public Document) का दर्जा दिया गया है। इसका लाभ यह होगा कि अदालत में इन दस्तावेजों को प्रमाणित करने के लिए संबंधित अधिकारी को बार-बार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर साक्ष्य देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत होगी।

हालांकि यदि कोई आरोपी अभियोजन स्वीकृति आदेश की वैधानिकता, प्रक्रिया या आदेश जारी करने वाले अधिकारी की क्षमता को चुनौती देता है, तो न्यायालय कानून के अनुसार संबंधित अधिकारी को तलब कर सकता है। इस व्यवस्था से एक ओर प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, वहीं दूसरी ओर कानूनी अधिकारों और न्यायिक समीक्षा की व्यवस्था भी बरकरार रखी गई है।

सरकार के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया से लंबित मामलों में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। साथ ही यह व्यवस्था सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत करेगी।

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