शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की, लेकिन दिन चढ़ने के साथ निवेशकों का उत्साह फीका पड़ गया और बाजार गिरावट की ओर मुड़ गया। सुबह तेजी के साथ खुले प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोपहर तक अपने शुरुआती लाभ गंवाकर लाल निशान में पहुंच गए। मुनाफावसूली, बढ़ती महंगाई की आशंका, आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव बनाया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 357 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 74,700 के पार पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी 23,500 के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा था। हालांकि यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। दोपहर तक बिकवाली बढ़ने लगी और सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 650 अंकों से अधिक नीचे आ गया। निफ्टी भी 23,300 के करीब फिसल गया।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली को माना जा रहा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, जिसके बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपने मुनाफे को सुरक्षित करना उचित समझा। नतीजतन शुरुआती खरीदारी के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ता गया।
इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था। RBI का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और ईंधन लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बना रह सकता है।
RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने यह भी संकेत दिया कि कमजोर मानसून और एल-नीनो जैसी मौसम संबंधी चुनौतियां खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इन आशंकाओं ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।
महंगाई के साथ-साथ आर्थिक विकास को लेकर भी केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण बाजार को उत्साहित नहीं कर पाया। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान पिछले वित्त वर्ष की 7.6 प्रतिशत विकास दर से भी कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी दबाव दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल आर्थिक वृद्धि को गति देने के बजाय महंगाई को नियंत्रित रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने पर अधिक ध्यान दे रहा है। लंबी अवधि में यह रणनीति अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, लेकिन निकट अवधि में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को वर्तमान परिस्थितियों में सतर्कता बरतनी चाहिए और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान देना चाहिए। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, मानसून की स्थिति और महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।