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संस्कारों की पाठशाला बना जैन मंदिर : शिविर में बच्चे सीख रहे जीवन जीने की कला, मोबाइल से दूरी-बड़ों का आदर करने का मिला पाठ

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रायपुर – डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में तेजी से उलझते जा रहे हैं, वहीं रायपुर के ऐतिहासिक श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित ग्रीष्मकालीन संस्कार शिविर बच्चों को जीवन जीने की सही कला, भारतीय संस्कृति के मूल्यों और नैतिक संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। शिविर में बच्चों को धर्म, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, मोबाइल से दूरी और आदर्श जीवनशैली का पाठ खेल-खेल में सिखाया जा रहा है, जिससे उनमें सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

गुरुकुल में ज्ञान की सरिता बहा रहे शास्त्री जी
शिविर के शैक्षणिक सत्र में सांगानेर (जयपुर) से पधारे प्रतिष्ठित विद्वान पंडित शरद जैन शास्त्री बच्चों को अत्यंत सरल, सुबोध और रोचक शैली में ‘बाल बोध भाग-1’ और ‘बाल बोध भाग-2’ का अध्ययन करा रहे हैं। उनकी अनूठी शिक्षण पद्धति के कारण जटिल धार्मिक सिद्धांत भी बच्चों को खेल-खेल में सहजता से समझ में आ रहे हैं, जिससे उनमें धर्म और संस्कृति के प्रति विशेष रुचि विकसित हो रही है।

संस्कारों की सीख, जीवन की दिशा
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बच्चों को केवल धार्मिक और शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ यानी जीवन को सही ढंग से जीने की कला भी सिखाई जा रही है। बच्चों को माता-पिता, गुरुजनों एवं अतिथियों का सम्मान करने, परिवार में अनुशासन बनाए रखने और बड़ों की बातों का आदरपूर्वक पालन करने के संस्कार दिए जा रहे हैं।

रचनात्मक गतिविधियों, अध्ययन और संस्कारों की ओर प्रेरित
वर्तमान समय की गंभीर समस्या बन चुकी मोबाइल की लत से बच्चों को दूर रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर रचनात्मक गतिविधियों, अध्ययन और संस्कारों की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही आदर्श दिनचर्या, सदाचार, शुद्ध शाकाहार और नैतिक मूल्यों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

समाज के प्रबुद्ध जनों ने की सराहना

जैन समाज के प्रबुद्ध जनों एवं वरिष्ठ श्रावकों ने इस संस्कार शिविर की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। उनका कहना है कि, आज के भौतिकवादी और तकनीक प्रधान युग में ऐसे शिविर बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। समाजजनों ने इसे नई पीढ़ी में नैतिक एवं सांस्कृतिक चेतना जागृत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया है। शिविर में प्रतिदिन शिविरार्थियों के लिए सात्विक स्वल्पाहार की भी सुव्यवस्थित व्यवस्था की जा रही है, जिससे बच्चों को संस्कारों के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी मिल रहा है।

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