Meta Pixel

दवाओं की कमी पर CGMSC का बड़ा दावा, गोदामों में 400 से ज्यादा दवाएं मौजूद, मानसून से पहले बढ़ाया गया स्टॉक

Spread the love

छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने बड़ा दावा किया है। कॉर्पोरेशन के अनुसार राज्य के विभिन्न गोदामों में वर्तमान में 400 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि 150 से ज्यादा दवाओं की खरीद प्रक्रिया पूरी कर उनके लिए सप्लाई ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। इन दवाओं की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवा उपलब्धता और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

CGMSC का कहना है कि प्रदेशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से मिलने वाली मांग के अनुसार लगातार दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। नई खेप पहुंचने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। कॉर्पोरेशन के मुताबिक सामान्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में स्टॉक में मौजूद हैं।

बीपी और हृदय रोगियों के लिए एम्लोडिपिन, एनालाप्रिल और टेल्मिसार्टन जैसी दवाएं उपलब्ध हैं। वहीं मधुमेह के मरीजों के लिए ग्लाइमिप्राइड और इंसुलिन का भी पर्याप्त भंडार रखा गया है। बुखार और दर्द से राहत देने वाली पैरासिटामोल 500 और 650 एमजी टैबलेट के साथ-साथ पैरासिटामोल इंजेक्शन भी स्टॉक में मौजूद हैं। संक्रमण के इलाज में उपयोग होने वाली एमोक्सिसिलिन, सेफिक्सिम, मेट्रोनिडाजोल समेत कई महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता का भी दावा किया गया है।

कॉर्पोरेशन ने यह भी बताया कि ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है। एंटी रेबीज वैक्सीन, एंटी स्नेक वेनम, अमिकासिन और अन्य आवश्यक इंजेक्शन गोदामों में उपलब्ध हैं। इसके अलावा हेमोफीलिया रोगियों के इलाज के लिए जरूरी विशेष फैक्टर्स भी सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उपलब्ध कराए जा सकें।

मानसून सीजन को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। बारिश के दौरान मलेरिया, डायरिया, वायरल फीवर और श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मलेरिया रोधी दवाओं जैसे प्राइमाक्वीन और क्वीनिन सल्फेट का अतिरिक्त स्टॉक तैयार किया गया है। विभाग का दावा है कि कई अन्य दवाओं की अतिरिक्त खेप भी जल्द गोदामों तक पहुंचने वाली है।

दवाओं के साथ-साथ अस्पतालों में उपयोग होने वाले सर्जिकल और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। सिरिंज, नीडल, कॉटन, गॉज, ग्लव्स और ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी सामग्री का पर्याप्त स्टॉक सभी वेयरहाउस में रखा गया है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

इस बीच स्वास्थ्य विभाग और CGMSC मिलकर करीब 100 ऐसी अत्यावश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की अलग सूची तैयार कर रहे हैं जिन्हें हर परिस्थिति में उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और शहरी स्वास्थ्य संस्थानों में इन महत्वपूर्ण दवाओं की कभी कमी न हो।

दवा उपलब्धता की निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आईटी आधारित डैशबोर्ड और मॉनिटरिंग सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है। इस व्यवस्था के जरिए अधिकारियों को रियल टाइम में स्टॉक की स्थिति की जानकारी मिलेगी, जिससे दवाओं की कमी होने से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

CGMSC का दावा है कि मानसून और संभावित मौसमी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए राज्यभर में दवा और मेडिकल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारी की गई है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *