धमतरी जिले में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब महज कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन हजारों स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के 215 स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं और आशंका जताई जा रही है कि इस वर्ष भी बच्चों को इन्हीं खतरनाक भवनों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। स्कूल खुलने की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन जर्जर भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण या नए भवनों के निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने जिले के 215 जर्जर स्कूलों की सूची ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (आरईएस) को भेजी है। इन स्कूलों का निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जाना था, ताकि आगे मरम्मत, पुनर्निर्माण या भवनों को तोड़ने की कार्रवाई की जा सके। हालांकि अब तक आरईएस के इंजीनियरों ने इन स्कूलों का निरीक्षण नहीं किया है और न ही कोई रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी गई है।
नियमों के अनुसार जब तक आरईएस की तकनीकी रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी भी भवन को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि स्कूल भवनों की बड़ी मरम्मत, पुनर्निर्माण या डिस्मेंटलिंग की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। परिणामस्वरूप कई स्कूलों के छात्र एक बार फिर जोखिम भरे माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हो सकते हैं।
हर साल ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी इलाकों से जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में भी बड़ी संख्या में स्कूलों के लिए मरम्मत और नए भवनों की मांग की गई थी। इस बार छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन नया सत्र शुरू होने से पहले भी स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार अब तक किसी भी जर्जर स्कूल के लिए नए भवन की स्वीकृति नहीं मिली है। वहीं बड़ी मरम्मत के लिए भी राशि जारी नहीं की गई है। हालांकि कुछ स्कूलों को छोटी-मोटी मरम्मत के लिए सीमित फंड मिला है, लेकिन इससे जर्जर भवनों की मूल समस्या का समाधान संभव नहीं है।
इस गंभीर विषय को जिला प्रशासन ने भी महत्व दिया था। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए शिक्षा विभाग से फोटो सहित जर्जर स्कूलों की सूची मंगवाई थी। इसके बाद 42 अत्यंत जर्जर स्कूलों की पहचान कर उनके लिए नए भवन निर्माण की मांग करते हुए शिक्षण संचालनालय को प्रस्ताव भेजा गया था। बावजूद इसके अब तक इन स्कूलों के लिए आवश्यक बजट या मंजूरी नहीं मिल सकी है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले शैक्षणिक सत्र में 60 ऐसे स्कूल भवनों को चिन्हित किया गया था जो पूरी तरह अतिजर्जर हो चुके थे और जिन्हें तत्काल तोड़ने की जरूरत थी। इन भवनों को डिस्मेंटल करने का प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन उस दिशा में भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं शिक्षा विभाग द्वारा आरईएस को भेजी गई 215 स्कूलों की सूची पर भी कोई प्रगति नहीं दिख रही है। न तो निरीक्षण कार्य पूरा हुआ है और न ही तकनीकी रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में नया सत्र शुरू होने से पहले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
शिक्षा और सुरक्षा दोनों के लिहाज से यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। यदि समय रहते निरीक्षण, मरम्मत और नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो हजारों विद्यार्थियों को एक बार फिर जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ सकती है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।