छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के किसानों, निवेशकों, शहरी परिवहन और खनन क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। महानदी भवन में हुई बैठक में कृषि, ऊर्जा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, योग शिक्षा, परिवहन और खनिज प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का सीधा असर लाखों किसानों, आम नागरिकों और उद्योग क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है।
कैबिनेट की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में कृषक उन्नति योजना का नया स्वरूप शामिल है। सरकार ने खरीफ 2026 से धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत जो किसान धान की जगह दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी वैकल्पिक फसलें उगाएंगे, उन्हें प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से किसानों की आय बढ़ेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि क्षेत्र अधिक टिकाऊ बनेगा। योजना का लाभ एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर दिया जाएगा। कृषि विशेषज्ञ इसे राज्य में फसल विविधीकरण की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मंत्रिपरिषद ने Chhattisgarh State Power Transmission Company Limited को आईपीओ के माध्यम से शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले से आम नागरिक और निवेशक कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बन सकेंगे। साथ ही कंपनी की वित्तीय क्षमता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गरीब परिवारों के लिए भी कैबिनेट ने राहत भरा फैसला लिया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को चना वितरण जारी रखने के लिए राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से चना खरीदने की अनुमति दी गई है। इससे वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी राशन कार्डधारकों को चना वितरण बिना किसी बाधा के जारी रहेगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मंत्रिपरिषद ने योग विषय को समाज कल्याण विभाग से हटाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे योग शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों का बेहतर समन्वय हो सकेगा तथा आयुष प्रणाली से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूती मिलेगी।
शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। इन ई-बसों के शुरू होने से नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
नवा रायपुर के विकास को गति देने के लिए मंत्रिपरिषद ने भूमि क्रय पर दी जा रही स्टाम्प ड्यूटी छूट की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दी है। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी और नवा रायपुर अटल नगर में आधारभूत संरचना विकास को बढ़ावा मिलेगा।
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। छत्तीसगढ़ खनिज नियम 2009 में बदलाव करते हुए खनिज परिवहन करने वाले वाहनों में RFID टैग और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही खनिजों की मात्रा और गुणवत्ता निर्धारण के लिए आधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, राजस्व बढ़ेगा और खनन गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी। इसके अलावा भंडारण शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट में भी वृद्धि की गई है।
कुल मिलाकर साय कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए निर्णयों को किसानों की आय बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने, सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।