कीमती धातुओं के बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सोना और चांदी दोनों के दामों में तेज कमजोरी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 4,090 रुपये की गिरावट आई है, जिसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव घटकर लगभग 1.48 लाख रुपये रह गया है। वहीं चांदी की कीमत में 9,658 रुपये की भारी कमी दर्ज की गई है और एक किलो चांदी का भाव घटकर करीब 2.36 लाख रुपये पर पहुंच गया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते निवेशकों का रुझान बदलता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है।
चांदी में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 31 मई को जहां एक किलो चांदी की कीमत लगभग 2.63 लाख रुपये थी, वहीं मात्र 10 दिनों के भीतर इसमें करीब 27 हजार रुपये की गिरावट आ चुकी है। इसी अवधि में सोने के दाम भी लगभग 8 हजार रुपये तक नीचे आ गए हैं।
यदि इस वर्ष की शुरुआत से तुलना करें तो सोने और चांदी दोनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2025 के अंत में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1.33 लाख रुपये थी, जो जनवरी के अंत में बढ़कर 1.76 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद से सोना करीब 28 हजार रुपये तक सस्ता हो चुका है।
चांदी का प्रदर्शन भी कुछ ऐसा ही रहा। वर्ष 2025 के अंत में चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था, जो जनवरी में बढ़कर 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद लगातार बिकवाली के चलते अब चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 1.50 लाख रुपये तक नीचे आ चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक अपनी पूंजी को नकद रूप में रखना अधिक सुरक्षित समझ रहे हैं। ऐसे में वे सोना और चांदी बेचकर लिक्विडिटी बढ़ा रहे हैं। दूसरा, जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बड़े निवेशकों द्वारा की गई प्रॉफिट बुकिंग ने भी बाजार में दबाव बढ़ाया है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय तनाव की स्थिति पर निर्भर करेगी। फिलहाल दोनों धातुओं में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।