रायपुर के डीडीनगर थाना क्षेत्र में एचपी गैस एजेंसी के सुपरवाइजर से हुई 10 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट का पुलिस ने आंशिक खुलासा कर दिया है। घटना के चार दिन बाद पुलिस ने मामले में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से 7 लाख रुपये बरामद किए हैं। हालांकि वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस लूटकांड का मास्टरमाइंड MBA डिग्रीधारी युवक है, जबकि उसका एक साथी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है। दोनों आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और लंबे समय से रायपुर में किराए के मकान में रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी गौरव पहले सट्टा संचालन के मामले में जेल भी जा चुका है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गौरव का अग्रसेन चौक स्थित श्री बालाजी कॉर्पोरेट ऑफिस में अक्सर आना-जाना था। इसी दौरान उसने देखा कि कई लोग यहां बड़ी रकम लेकर आते-जाते हैं। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना तैयार की और संभावित शिकारों की निगरानी शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने करीब डेढ़ से दो महीने तक इलाके की रेकी की। वे यह पता लगाने की कोशिश करते रहे कि किस समय सबसे ज्यादा नकदी का लेन-देन होता है और कौन व्यक्ति बड़ी रकम लेकर निकलता है। घटना से पहले भी आरोपियों ने दो-तीन लोगों का पीछा किया था, लेकिन सुरक्षित मौका नहीं मिलने के कारण वारदात को अंजाम नहीं दे पाए।
घटना वाले दिन पांचों आरोपी कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर शिकार की तलाश में मौजूद थे। इसी दौरान गैस एजेंसी के सुपरवाइजर श्रवण साहू नकदी से भरा बैग लेकर बाहर निकले और अपनी कार में बैठ गए। आरोपियों ने दो अलग-अलग रास्तों से उनका पीछा शुरू किया और डंगनिया तक पहुंच गए।
जैसे ही श्रवण साहू अपनी कार से उतरकर बैग लेकर आगे बढ़े, आरोपियों ने झपट्टा मारकर नोटों से भरा बैग छीना और मौके से फरार हो गए। वारदात के बाद सभी आरोपी गोल चौक के पास एकत्र हुए, जहां उन्होंने लूटी गई रकम का आपस में बंटवारा किया और फिर अलग-अलग दिशाओं में निकल गए।
पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने वारदात से पहले अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। उन्हें अंदेशा था कि मोबाइल लोकेशन और डंप डेटा के जरिए पुलिस उन तक पहुंच सकती है। रायपुर की सीमा से बाहर निकलने के बाद ही उन्होंने अपने मोबाइल दोबारा चालू किए।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अग्रसेन चौक से डंगनिया, गोल चौक और सुंदर नगर तक करीब 3800 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी जांच में संदिग्ध एक्टिवा और आरोपियों की गतिविधियों के महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर दो आरोपियों तक पहुंचना संभव हो सका।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है और फरार तीन अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और शेष रकम भी बरामद कर ली जाएगी।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि शिक्षित होने के बावजूद कुछ लोग आसान पैसे की लालच में अपराध का रास्ता चुन लेते हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा किया जा सके।