देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कई बड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मैगी के एक पैकेट में कथित तौर पर जिंदा कीड़े (लार्वा) मिलने की शिकायत के बाद नेस्ले इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं, हाइजीन से जुड़े मामलों में KFC और खजूर के एक प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर फ्लिपकार्ट इंडिया तथा ओपन सीक्रेट को भी जवाब देने के लिए कहा गया है।
FSSAI ने नेस्ले इंडिया से विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है और तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। सबसे पहले कंपनी को उस बैच की पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें गड़बड़ी की शिकायत सामने आई है। साथ ही यह भी बताना होगा कि संबंधित कच्चा माल किस सप्लायर से प्राप्त किया गया था और पैकेजिंग से पहले गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई थी।
दूसरे बिंदु में नियामक ने कंपनी से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिकायत वाले बैच या संभावित रूप से प्रभावित उत्पादों को बाजार और सप्लाई चेन से तुरंत हटाया जाए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक संदिग्ध उत्पादों की पहुंच को रोकना है। तीसरे बिंदु के तहत कंपनी को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपने गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र में किए जाने वाले सुधारों की जानकारी भी देनी होगी।
नेस्ले इंडिया के लिए यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मैगी कंपनी का सबसे लोकप्रिय और राजस्व देने वाला उत्पाद है। वर्ष 2015 में भी मैगी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था, जब FSSAI ने लेड (सीसा) की अधिक मात्रा और लेबलिंग से जुड़े मुद्दों पर देशभर से मैगी वापस मंगाने का आदेश दिया था। उस विवाद के कारण कंपनी को आर्थिक और प्रतिष्ठागत दोनों तरह का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
इस बार मामला सोशल मीडिया पर सामने आई उपभोक्ता शिकायतों से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि उद्योग जगत में इसे एक नए ट्रेंड के रूप में देखा जा रहा है, जहां किसी उपभोक्ता की वायरल पोस्ट सीधे नियामकीय कार्रवाई का आधार बन सकती है। इससे कंपनियों पर गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
FSSAI की इस कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि अब खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता शिकायतों को लेकर नियामक पहले से कहीं अधिक सतर्क और सक्रिय है। आने वाले दिनों में कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं कंपनियों के लिए सिर्फ कानूनी चुनौती नहीं होतीं, बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे पर भी सीधा असर डालती हैं। ऐसे में गुणवत्ता नियंत्रण, सप्लाई चेन मॉनिटरिंग और पारदर्शिता बनाए रखना अब हर खाद्य कंपनी के लिए पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।