कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़ा विवाद अब कानूनी और संस्थागत स्तर पर गंभीर रूप लेता जा रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे और दर्शक हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे निर्धारित की है।
महिला आयोग ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की सामग्री और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
आयोग ने पुलिस से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट में एफआईआर की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच तथा कार्यक्रम के आयोजकों, कलाकारों और आयोजन स्थल प्रबंधन की भूमिका से जुड़ी जानकारी देने को कहा गया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब प्रणित मोरे के शो के दौरान दर्शक हिमांशु जांगड़ा द्वारा की गई एक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद व्यापक आलोचना हुई और जिस कंपनी में हिमांशु कार्यरत थे, उसने भी उन्हें नौकरी से हटा दिया।
विवाद यहीं नहीं रुका। इसी दौरान प्रणित मोरे के एक अन्य पुराने शो का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें मेडिकल छात्रा सेजल पवार ने मेडिकल शिक्षा के दौरान उपयोग किए जाने वाले दान किए गए शवों (कैडवर) को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। वीडियो में शवों और उनके अंगों को लेकर की गई टिप्पणियों पर मेडिकल समुदाय और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इस मामले में ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन ने कहा कि बॉडी डोनर्स मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अमूल्य योगदान देते हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार की असंवेदनशील या अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। AIMSA ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
बढ़ते विवाद के बीच महाराष्ट्र साइबर विभाग ने भी कार्रवाई करते हुए प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, सेजल पवार और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन कंटेंट में महिलाओं, सहमति तथा मृत व्यक्तियों के संबंध में आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणियां की गई थीं।
विवाद बढ़ने के बाद सेजल पवार ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और भविष्य में वे ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएंगी। वहीं पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है और विभिन्न संगठन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।
अब सभी की निगाहें 22 जून को होने वाली राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई और पुलिस जांच की आगामी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे मामले की दिशा और संभावित कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।