खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से सीधे बातचीत कर इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी कार्रवाई किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
बीते कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र से गुजर रहे कई व्यापारिक जहाज हमलों का शिकार हुए। 8 जून से 11 जून के बीच मारिवेक्स, सेटेबेलो और जलवीर नामक जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आईं। इनमें 10 जून को सेटेबेलो जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों—आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश—की मौत हो गई। इस दुखद घटना ने भारत सरकार को गंभीर चिंता में डाल दिया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बातचीत के दौरान भारत की आपत्ति स्पष्ट शब्दों में दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की घातक सैन्य कार्रवाई न केवल खतरनाक है, बल्कि वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।
भारत सरकार ने केवल कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि आधिकारिक रूप से भी विरोध दर्ज कराया है। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ राजनयिक जेसन मीक्स को तलब कर भारतीय पक्ष की चिंता और नाराजगी से अवगत कराया गया। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे गंभीर और अस्वीकार्य घटना बताया है। दूसरी ओर ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका अपनी नीतिगत विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक गतिविधियों और समुद्री परिवहन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत लगातार क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है। लाखों भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं और वैश्विक व्यापार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यही कारण है कि समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान रखती है।
इस घटना के बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही, क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।