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PM मोदी का फ्रांस में भव्य स्वागत: मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता आज, राफेल डील और 12 अहम समझौतों पर टिकी नजरें

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात अपने 6 दिवसीय विदेश दौरे के पहले चरण में फ्रांस के नीस शहर पहुंचे। होटल में बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय समुदाय ने पीएम का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला जब पीएम ने एक बच्चे को दुलार किया और वहां मौजूद महिलाओं ने उनके हाथ को माथे से लगाकर अपना सम्मान व्यक्त किया। नीस में पीएम मोदी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शिरकत की।

राष्ट्रपति मैक्रों के साथ अहम बैठक
प्रधानमंत्री मोदी आज दोपहर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण ‘भारत इनोवेट्स’ (Bharat Innovates) कार्यक्रम का उद्घाटन है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मेडिकल टेक्नोलॉजी, स्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में 12 बड़े समझौतों पर मुहर लग सकती है।

राफेल डील और ‘सोर्स कोड’ पर चर्चा
भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील एक बड़ा मुद्दा है। भारत चाहता है कि इन विमानों में भारतीय हथियारों को एकीकृत करने की सुविधा मिले, जिसके लिए ‘सोर्स कोड’ का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहेगा। इस डील पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।

फ्रांस और स्लोवाकिया का 6 दिवसीय दौरा
पीएम मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी 7वीं फ्रांस यात्रा है। इसके दो मुख्य चरण हैं:

  • फ्रांस: नीस, एवियान और पेरिस में कार्यक्रम। 16-17 जून को एवियान में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 18 जून को पेरिस में विवाटेक सम्मेलन में मैक्रों के साथ शामिल होंगे।
  • स्लोवाकिया: 14 जून की शाम पीएम फ्रांस से स्लोवाकिया रवाना होंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद यह किसी भारतीय पीएम का पहला दौरा होगा। 15 जून तक वहां पीएम रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी के साथ बैठकें करेंगे।

होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत की भूमिका
ईरान-इजराइल तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा एक बड़ा विषय है। भारत, फ्रांस और ब्रिटेन की पहल पर होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर सकता है। हालांकि, भारत किसी एक देश की अगुवाई वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाय संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय गठबंधन को प्राथमिकता देता है।

G7 समिट: भारत की वैश्विक भूमिका
भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के नाते प्रधानमंत्री को विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में बुलाया गया है। पीएम मोदी अब तक 7 बार G7 समिट में शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष फ्रांस की अध्यक्षता में होने वाली समिट में यूक्रेन युद्ध, गाजा-लेबनान संकट और वैश्विक आर्थिक असंतुलन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी।

रक्षा साझेदारी में फ्रांस का स्थान
फ्रांस हमेशा से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब दुनिया ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, तब भी फ्रांस ने सहयोग जारी रखा था। आज फ्रांस रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता है। मिराज 2000, राफेल और स्कॉर्पीन पनडुब्बी इसका प्रमाण हैं। फ्रांस ने हमेशा वैश्विक मंचों पर भी भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन दिया है।

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