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छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार धीमी, बारिश सीमित; बढ़ी गर्मी और उमस से लोग बेहाल

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छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, लेकिन व्यापक बारिश का इंतजार अभी भी बना हुआ है। प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने से तापमान में बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते लोगों को गर्मी और उमस का दोहरा सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार, मुंगेली और कवर्धा जैसे चुनिंदा जिलों में बारिश हुई, लेकिन प्रदेश के बड़े हिस्से अभी भी पर्याप्त वर्षा से वंचित हैं। यही वजह है कि दिन का तापमान बढ़ रहा है और वातावरण में नमी बढ़ने से उमस लोगों की परेशानी का कारण बन रही है।

रविवार को प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के ऊंचे तापमानों में शामिल है। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक है। रायपुर और जगदलपुर संभाग के आसपास के क्षेत्रों में तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखी गई है।

बारिश की बात करें तो मुंगेली जिले में लगभग 5 सेंटीमीटर और कवर्धा में करीब 1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई। हालांकि यह बारिश स्थानीय स्तर तक सीमित रही और पूरे प्रदेश में राहत देने में सफल नहीं हो सकी।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति फिलहाल धीमी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून छत्तीसगढ़ की दहलीज पर पहुंचकर ठहर सा गया है, जिसके कारण प्रदेश में व्यापक वर्षा की स्थिति नहीं बन पा रही है। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की सक्रियता पर टिकी हुई हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में कई मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। पश्चिम राजस्थान से गंगीय पश्चिम बंगाल तक समुद्र तल पर एक द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश से पश्चिम मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर मध्य महाराष्ट्र तक ऊपरी वायुमंडल में भी एक अन्य द्रोणिका सक्रिय है। इन प्रणालियों का प्रभाव आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के मौसम पर देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। लोगों को मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मानसून की दस्तक में हो रही देरी के बीच बढ़ती गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कब पूरी तरह सक्रिय होकर प्रदेश को राहत पहुंचाता है।

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