फुटबॉल और क्रिकेट भले ही दो अलग-अलग खेल हों, लेकिन तकनीक अब इन दोनों के बीच की दूरी तेजी से कम कर रही है। फीफा विश्व कप 2026 में ऐसा ही एक रोमांचक पल देखने को मिला, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों को भी हैरान कर दिया। स्वीडन और ट्यूनीशिया के मुकाबले में एक विवादित गोल को वैध ठहराने के लिए क्रिकेट के स्निकोमीटर जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, और अब यह फैसला दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बर्मिंघम में खेले गए इस मुकाबले में स्वीडन ने ट्यूनीशिया को 5-1 से करारी शिकस्त दी, लेकिन मैच का सबसे बड़ा आकर्षण स्कोरलाइन नहीं बल्कि तकनीक की भूमिका रही। दूसरे हाफ में मैदान पर उतरे मैटियास स्वानबर्ग ने केवल 18 सेकंड के भीतर गोल दाग दिया। शुरुआत में लाइनमैन ने इसे ऑफसाइड करार देते हुए गोल रद्द कर दिया, लेकिन इसके बाद मामला VAR तक पहुंचा और यहीं से खेल ने तकनीक का नया चेहरा दिखाया।
जांच के दौरान सामने आया कि स्वीडन के स्टार स्ट्राइकर Alexander Isak ने फ्री-किक के दौरान गेंद को बेहद हल्का सा स्पर्श किया था। यह टच इतना मामूली था कि नंगी आंखों से दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन गेंद में लगे माइक्रोचिप और सेंसर सिस्टम ने इसे रिकॉर्ड कर लिया। इसी स्पर्श की वजह से मैटियास स्वानबर्ग ऑनसाइड स्थिति में आ गए और VAR ने गोल को वैध घोषित कर दिया।
यह तकनीक क्रिकेट के स्निकोमीटर की याद दिलाती है, जहां बैट और गेंद के बीच संपर्क को वेवफॉर्म के जरिए पहचाना जाता है। फुटबॉल में इस्तेमाल हो रही यह तकनीक एडिडास की ‘कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी’ का हिस्सा है। विश्व कप में उपयोग की जा रही स्मार्ट बॉल के अंदर माइक्रोचिप लगी होती है, जो गेंद के हर स्पर्श की जानकारी तुरंत VAR सिस्टम तक पहुंचाती है। इससे रेफरी के फैसले अधिक सटीक और तेज हो जाते हैं।
रिप्ले में दिखाई गई वेवफॉर्म में स्पष्ट स्पाइक दर्ज हुआ, जिसने साबित कर दिया कि इसाक का गेंद से संपर्क हुआ था। यही वह निर्णायक सबूत बना जिसने मैच के सबसे विवादित क्षण को इतिहास में बदल दिया।
दरअसल, फुटबॉल में यह तकनीक नई नहीं है। FIFA World Cup 2022 में भी इसी प्रकार की तकनीक ने यह साबित किया था कि एक गोल के दौरान Cristiano Ronaldo ने गेंद को स्पर्श नहीं किया था। वहीं यूरो 2024 में भी एक विवादित गोल इसी तकनीकी विश्लेषण के आधार पर रद्द किया गया था।
क्रिकेट में स्निकोमीटर का विकास 1990 के दशक में अंग्रेज वैज्ञानिक Allan Plaskett ने किया था। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि बल्लेबाज ने गेंद को छुआ है या नहीं। हालांकि अब क्रिकेट में इससे भी उन्नत तकनीकें, जैसे अल्ट्राएज, अधिक इस्तेमाल होने लगी हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर और माइक्रोचिप आधारित तकनीकें खेलों में अंपायरिंग और रेफरिंग को पूरी तरह बदल सकती हैं। फीफा विश्व कप 2026 का यह विवादित गोल शायद आने वाले उस भविष्य की झलक है, जहां तकनीक ही अंतिम निर्णायक साबित होगी।