भारत सरकार ने कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऐसे उत्पादों की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर सख्ती बढ़ाते हुए डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन को अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सरकार ने इसके लिए दवा नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार, कफ सिरप को उन श्रेणियों से बाहर किया जाएगा, जिनके तहत अब तक बिना पर्ची के बिक्री संभव थी। नियम लागू होने के बाद बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह कफ सिरप का बढ़ता दुरुपयोग और कुछ सिरप में मौजूद नशीले तत्वों का गलत इस्तेमाल बताया जा रहा है। कई राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई थीं कि युवाओं द्वारा कफ सिरप का उपयोग नशे के रूप में किया जा रहा था। इसके अलावा, पिछले वर्षों में दूषित कफ सिरप से जुड़ी घटनाओं ने भी नियामकों की चिंता बढ़ाई है।
क्या बदल जाएगा?
नए नियम लागू होने के बाद:
- कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा।
- मेडिकल स्टोर को बिक्री का रिकॉर्ड रखना पड़ सकता है।
- बिना पर्ची दवा बेचने पर कार्रवाई और लाइसेंस रद्द होने का जोखिम बढ़ सकता है।
- ऑनलाइन फार्मेसी को भी प्रिस्क्रिप्शन सत्यापित करना होगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देगा और कफ सिरप के गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। हालांकि, सामान्य मरीजों को अब सर्दी-खांसी की दवा खरीदने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ सकती है।
फिलहाल यह एक नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है और मसौदे पर सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद देशभर में नियम लागू किए जाएंगे।