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NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर बैन, WhatsApp पर नहीं: आखिर दोनों में क्या है अंतर?

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NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाकर बड़ा कदम उठाया है। यह फैसला 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा से पहले संभावित पेपर लीक और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है—जब WhatsApp और Telegram दोनों मैसेजिंग ऐप हैं, तो फिर कार्रवाई सिर्फ Telegram पर ही क्यों हुई?

क्यों लगा Telegram पर प्रतिबंध?

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मुताबिक परीक्षा से पहले Telegram पर कई ऐसे चैनल सक्रिय पाए गए, जहां कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे थे। इन चैनलों के जरिए छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम वसूले जाने के आरोप भी सामने आए।

हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र सुरक्षित हैं और ऐसे दावे भ्रामक हैं, लेकिन इन गतिविधियों से परीक्षार्थियों के बीच भ्रम और चिंता बढ़ रही थी।

Telegram और WhatsApp में क्या है बड़ा अंतर?

1. पहचान छिपाने की सुविधा

Telegram पर यूजर मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए भी काम कर सकता है। साथ ही बड़े पब्लिक चैनल बनाए जा सकते हैं, जिनमें एडमिन की पहचान सार्वजनिक नहीं होती।

इसके विपरीत WhatsApp पर मोबाइल नंबर यूजर की मुख्य पहचान होता है, जिससे किसी खाते का पता लगाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।

2. बड़ी फाइलें शेयर करने की क्षमता

Telegram पर बड़े आकार की फाइलें आसानी से साझा की जा सकती हैं, जिससे दस्तावेजों और PDF फाइलों का प्रसार तेजी से होता है।

वहीं WhatsApp में फाइल शेयरिंग की सीमाएं अधिक हैं और कई मामलों में फाइलें कंप्रेस भी हो जाती हैं।

3. मैसेज एडिटिंग फीचर

Telegram का एक ऐसा फीचर भी चर्चा में है, जिसमें पुराने संदेशों को एडिट कर नई फाइलें जोड़ी जा सकती हैं, जबकि मूल पोस्ट का समय वही बना रहता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका उपयोग कथित फर्जी पेपर लीक दावों को विश्वसनीय दिखाने के लिए किया जा सकता है।

दूसरी ओर WhatsApp में संदेश संपादन सीमित समय तक ही संभव होता है और पहले से भेजे गए संदेशों में नई फाइल जोड़ने जैसी सुविधा नहीं है।

सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग में भी अंतर

WhatsApp की मूल कंपनी Meta Platforms की भारत में कानूनी उपस्थिति है और कंपनी सरकारी निर्देशों तथा अदालतों के आदेशों का पालन करती है।

इसके विपरीत, Telegram की भारत में स्थानीय मौजूदगी सीमित मानी जाती है, जिसके कारण तत्काल कार्रवाई और समन्वय में चुनौतियां सामने आती हैं।

अस्थायी है प्रतिबंध

सरकार ने स्पष्ट किया है कि Telegram पर लगाया गया प्रतिबंध स्थायी नहीं है।

  • Telegram एक्सेस पर रोक: 22 जून 2026 तक
  • Message Editing फीचर पर रोक: 30 जून 2026 तक

प्रतिबंध हटने के बाद उपयोगकर्ता अपने अकाउंट, चैट, ग्रुप और फाइलों को पहले की तरह एक्सेस कर सकेंगे।

क्या है सरकार का मकसद?

सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि यह कदम परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उद्देश्य किसी प्लेटफॉर्म को स्थायी रूप से बंद करना नहीं, बल्कि री-एग्जाम के दौरान किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकना है।

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