भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से फिर 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने दुनिया के चौथे सबसे बड़े इक्विटी बाजार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी के साथ बंद हुए बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घटती बाजार अस्थिरता का समर्थन मिला।
सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार चौथे दिन तेजी
बुधवार के कारोबार में प्रमुख सूचकांकों ने मजबूती के साथ दिन का अंत किया:
- NIFTY 50 0.40% की बढ़त के साथ 24,085.70 अंक पर बंद हुआ।
- BSE Sensex 0.45% चढ़कर 77,155.62 अंक पर पहुंच गया।
दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार चौथे दिन बढ़त दर्ज करने में सफल रहे।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिली राहत
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी। हालांकि अब तेल की कीमतों में आई गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत लेकर आई है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से:
- आयात बिल घटता है
- महंगाई पर दबाव कम होता है
- कंपनियों की लागत घटती है
इसी कारण बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को बल
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी बाजार को मजबूती दे रही है। हालिया सत्रों में विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ने से निवेशकों की धारणा सकारात्मक बनी हुई है।
व्यापक बाजार में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा।
India VIX में गिरावट, कम हुई बाजार की चिंता
बाजार की अस्थिरता मापने वाला India VIX भी हाल के दिनों में नीचे आया है।
VIX में गिरावट का मतलब है कि निवेशकों को निकट भविष्य में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका कम दिखाई दे रही है। इससे जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है और निवेशक शेयर बाजार में अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
अब फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर
वैश्विक निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हैं।
बाजार को उम्मीद है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि महंगाई, आर्थिक विकास और भविष्य की ब्याज दरों को लेकर फेड की टिप्पणी वैश्विक और भारतीय बाजारों की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल मजबूत निवेश प्रवाह, घटती अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।