रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और रेत कारोबार को लेकर माफिया नेटवर्क का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में राज्य के कई जिलों से हत्या, गोलीबारी, अधिकारियों पर हमले और पत्रकारों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोरिया से लेकर बिलासपुर, राजनांदगांव, गरियाबंद, कवर्धा और जांजगीर-चांपा तक रेत घाटों पर वर्चस्व की लड़ाई कई बार खूनी संघर्ष में बदल चुकी है। उपलब्ध मामलों के अनुसार इन घटनाओं में अब तक कम से कम 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
केस-1: कोरिया में तीन लोगों की हत्या
18 जून 2026 को Koriya District के सोनहत क्षेत्र में रेत कारोबार से जुड़े विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि हमलावरों ने एक वाहन को घेरकर उसमें आग लगा दी, जिसमें भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी।
केस-2: राजनांदगांव में ग्रामीणों पर फायरिंग
जून 2025 में Rajnandgaon जिले के मोहड़ गांव में अवैध खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर कथित तौर पर गोलीबारी की गई। घटना में तीन लोग घायल हुए थे। मामले के बाद पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की और संबंधित थाना प्रभारी को भी निलंबित किया गया।
केस-3: जांजगीर-चांपा में कांग्रेस नेता के बेटे की हत्या
अप्रैल 2026 में Janjgir-Champa जिले में कांग्रेस नेता के बेटे आयुष कश्यप की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।
केस-4: पत्रकारों पर हमला
गरियाबंद जिले में अवैध रेत खनन की रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों पर कथित तौर पर हमला किया गया। पत्रकारों के साथ मारपीट, उपकरण छीनने और हवाई फायरिंग जैसी घटनाओं ने मीडिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
केस-5: वन विभाग की टीम पर हमला
सितंबर 2024 में Kabirdham District (कवर्धा) में कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमला किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
केस-6: बिलासपुर में गैंगवार जैसी स्थिति
मई 2025 में Bilaspur जिले के रेत घाट पर दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद हुआ। इस दौरान गोली चलने की घटना सामने आई और एक व्यक्ति घायल हो गया। मामले ने रेत कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और संघर्ष को उजागर किया।
50 से अधिक स्थानों पर अवैध खनन के आरोप
इन चर्चित घटनाओं के अलावा धमतरी, महासमुंद, राजिम, आरंग और जनकपुर समेत कई क्षेत्रों में भी अवैध खनन के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है।
नया नियम लागू, लेकिन चुनौतियां बरकरार
राज्य में नया रेत नियम लागू किए जाने और निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग के निर्देशों के बावजूद अवैध खनन की शिकायतें पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही हैं। खनिज विभाग समय-समय पर कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर माफिया नेटवर्क की पकड़ कई क्षेत्रों में बनी हुई बताई जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेत कारोबार में बढ़ते आर्थिक हित, स्थानीय स्तर पर प्रभाव और संगठित नेटवर्क के कारण यह समस्या लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे में प्रभावी निगरानी, त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी खनन व्यवस्था ही इस चुनौती से निपटने का स्थायी समाधान हो सकती है।