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अमेरिका-ईरान समझौते पर मोजतबा खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया, कहा- कई आपत्तियों के बावजूद MoU को दी मंजूरी

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अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों द्वारा शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई की पहली आधिकारिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ हुए इस समझौते को लेकर उनके मन में कई गंभीर आपत्तियां और संदेह थे।

इसके बावजूद, देश की मौजूदा परिस्थितियों, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों की प्रतिबद्धता व आश्वासनों को देखते हुए उन्होंने इस द्विपक्षीय मसौदे को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान की है।

​डोनाल्ड ट्रंप पर पैंतरेबाजी का आरोप और शर्तों के साथ समझौते को मंजूरी
​ईरानी राष्ट्र के नाम जारी अपने पहले संदेश में मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए। सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस एमओयू को अस्तित्व में लाने के लिए हर तरह की पैंतरेबाजी, दबाव और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया, जो उनकी बेताबी को दर्शाता है।

खामेनेई ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन को इस शर्त पर अपनी सहमति दी है कि इस पूरे समझौते के दौरान ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ के सहयोगियों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी और इनसे किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा।

​अत्यधिक मांगें रखने पर अमेरिका को सीधी चेतावनी और 60 दिनों का टाइमफ्रेम
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिकी प्रशासन को सख्त लहजे में सचेत करते हुए कहा कि यदि आगामी चर्चाओं में अमेरिकी पक्ष ने अपनी तरफ से अत्यधिक या अनुचित मांगें थोपने की कोशिश की, तो ईरानी नेतृत्व उसे कतई स्वीकार नहीं करेगा और तुरंत पीछे हट जाएगा।

उन्होंने देश के भीतर इस समझौते के आलोचकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ 60 दिनों की आधिकारिक वार्ता अवधि में प्रवेश कर रहा है। इन 60 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को जमीनी स्तर पर पूरा संयम बरतना होगा ताकि विधिक बारीकियों को अंतिम रूप दिया जा सके।

मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की वार्ताओं का अर्थ यह बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरान ने अमेरिकी दृष्टिकोण या उसकी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह बातचीत किसी कमजोरी के कारण नहीं, बल्कि देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने के लिए की जा रही है।

उन्होंने साफ किया कि आगे होने वाली प्रत्यक्ष वार्ताएं इस बात का संकेत नहीं हैं कि ईरान दुश्मन के नजरिए से दुनिया को देख रहा है। उन्होंने ईरानी जनता से आह्वान किया कि वे देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखते हुए शर्तों के पूरा होने की प्रतीक्षा करें।

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