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कलेक्टरों की शक्तियां बढ़ाई गईं : नक्सल खतरे की आशंका से दो संगठनों पर बढ़ाया प्रतिबंध

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रायपुर – छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य के गृह विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 के तहत विशेष शक्तियां प्रदान की हैं। यह आदेश राज्य के सभी जिलों पर प्रभावी होगा। दूसरी ओर राज्य में नक्सलवाद समाप्त होने के बाद नक्सल संगठनों के खतरे की आशंका के मद्देनजर दो संगठनों पर प्रतिबंध बढ़ाया गया है।

दरअसल,  सरकार को ऐसी रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं कि कुछ असामाजिक तत्व सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और लोक व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश में सक्रिय हैं। इन तत्वों की गतिविधियां राज्य की सुरक्षा के लिए प्रतिकूल साबित हो सकती हैं, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कठोर कदम उठाया है। राज्य सरकार ने परिस्थितियों का आकलन करने के बाद जिला दंडाधिकारियों को यह शक्ति दी है कि वे जनहित में एहतियाती कदम उठा सकें।

छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में 30 जून तक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) प्रभावी
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, जिला दंडाधिकारी 1 अप्रैल, 2026 से 30 जून, 2026 तक की अवधि के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा-3 की उप-धारा (2) के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत होंगे। यह विशेष अधिकार प्रदेश के समस्त जिलों- रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर संभाग के सभी जिले और अन्य नवगठित जिलों सहित कुल 33 जिलों में लागू रहेंगे।

क्या होती हैं ये शक्तियां
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत जिला दंडाधिकारियों को यह अधिकार प्राप्त होता है कि यदि उन्हें किसी व्यक्ति की गतिविधियां देश की सुरक्षा, विदेशी संबंधों या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा महसूस होती हैं, तो वे उस व्यक्ति को हिरासत में लेने का आदेश दे सकते हैं। यह एक निरोधात्मक कानून है, जिसका उपयोग अपराध होने से रोकने के लिए किया जाता है, न कि सजा देने के लिए।

दो संगठन संगठनों पर बढ़ाया प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ सरकार भले ही राज्य में नक्सलवाद के लगभग समाप्त होने का दावा कर रही हो, लेकिन राज्य सरकार के ताजा फैसले से यह संकेत भी मिला है कि सुरक्षा एजेंसियां अब भी नक्सल समर्थित या उनसे जुड़े माने जाने वाले संगठनों को संभावित खतरे के रूप में देख रही हैं। राज्य सरकार ने पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) और तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) पर लगा प्रतिबंध एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। यह प्रतिबंध 19 जून 2026 से प्रभावी होगा। गृह विभाग के अनुसार , इन दोनों संगठनों की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था, लोक शांति तथा कानून द्वारा स्थापित राज्य व्यवस्था और उसकी संस्थाओं के कामकाज में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने, आम जनता को भय और आतंक के माहौल से दूर रखने तथा आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध जारी रखना आवश्यक है।

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