करपावंड में जमीन की नापजोख और कब्जा दिलाने गई राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम पर हुए हमले के मामले में बस्तर पुलिस ने त्वरित और बड़ी कार्रवाई की है। शासकीय कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज, और राजस्व निरीक्षक देवेंद्र श्रीवास पर लात-मुक्कों से हमला करने के आरोप में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों, डाकेंद्र नेताम और मनीराम बघेल, को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो फुटेज और मौके पर मौजूद गवाहों के आधार पर हुड़दंग करने वाली भीड़ की पहचान की। शासकीय टीम पर पथराव, धक्कामुक्की, और माहौल खराब करने के आरोप में 12 अन्य ग्रामीणों को भी गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस तरह मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 14 तक पहुंच गई है।
मामले के दो मुख्य सूत्रधार, गांव के सरपंच लखमू राम नेताम और पंच लोकेंद्र निषाद, फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस जुटी है। पुलिस की एफआईआर में सरपंच को भीड़ को भड़काने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मुख्य आरोपी बताया गया है।
कोर्ट के आदेश पर पहुंची थी राजस्व टीम यह पूरी कार्रवाई तीन उच्च राजस्व अदालतों- एसडीएम कोर्ट (बकावंड), बस्तर संभाग आयुक्त कोर्ट (जगदलपुर), और छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल- के आदेश के बाद की जा रही थी। शुक्रवार सुबह 11 बजे आरआई देवेंद्र श्रीवास, 5 हल्का पटवारियों, कोटवार, और पुलिस बल के साथ खसरा नंबर 567 (रकबा 0.60 हेक्टेयर) का कब्जा सौंपने पहुंचे थे। वहां दोपहर में विवाद भड़क गया था।
ग्रामीणों, सरपंच का आरोप नक्शा जो दिखा रहे, वही पूरी तरह गलत है राजस्व टीम पर हमले की कार्रवाई के बीच ग्रामीणों और फरार सरपंच पक्ष ने भी प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विवाद की असली वजह अधिकारियों की लापरवाही है। ग्रामीणों और सरपंच का सीधा आरोप है कि जिस नक्शे के आधार पर राजस्व टीम सीमांकन कर रही थी, वह जमीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाता। सरकारी रिकॉर्ड में भारी विसंगति है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान नक्शे में इस जमीन को मुख्य सड़क से लगा हुआ (फ्रंट पर) दिखाया जा रहा है।