22 जून से शुरू होने वाला कारोबारी सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाला है। मुहर्रम के कारण इस सप्ताह बाजार केवल चार दिन खुला रहेगा, लेकिन इन चार दिनों में ही कई ऐसे फैक्टर्स हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। विदेशी निवेशकों की वापसी, अमेरिका-ईरान तनाव, आईटी सेक्टर में दबाव और तकनीकी संकेतकों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
निफ्टी के लिए अहम स्तर
सपोर्ट जोन: 23,936 | 23,870 | 23,820 | 23,466 | 23,345 | 23,320
रेजिस्टेंस जोन: 24,140 | 24,382 | 24,450 | 24,480 | 24,535 | 24,646
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी 24,200 के ऊपर टिकता है तो 24,500 का स्तर जल्द देखने को मिल सकता है। वहीं 23,800 के नीचे फिसलने पर कमजोरी बढ़ सकती है।
बाजार की दिशा तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर्स
1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता
हालांकि दोनों देशों के बीच 60 दिनों के सीजफायर और बातचीत की पहल हुई थी, लेकिन हालात फिर तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए बयानों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनियों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
रविवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हो रही है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर का असर सीधे कच्चे तेल और शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
2. आईटी शेयरों में दबाव जारी रहने के संकेत
पिछले कारोबारी सत्र में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
इसकी बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को कम करना रहा। इससे निवेशकों को आशंका है कि भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल आईटी सेक्टर में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।
3. विदेशी निवेशकों की वापसी से बढ़ा भरोसा
कई महीनों तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) फिर से भारतीय बाजार में खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। बीते सप्ताह उन्होंने लगभग 3,400 करोड़ रुपए का निवेश किया।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 7,100 करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीदारी की। यह संकेत देता है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है।
4. रुपये में स्थिरता से मिली राहत
डॉलर के मुकाबले रुपया 94.32 के आसपास स्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार रिजर्व बैंक की सक्रियता और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया है।
रुपये में स्थिरता विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है और इससे बाजार को समर्थन मिल सकता है।
5. तकनीकी संकेत अभी भी बुलिश
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी अभी भी अपने 20 और 50 दिन के EMA के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो दीर्घकालिक तेजी का संकेत है।
अगर 24,150-24,200 का स्तर टूटता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है और निफ्टी 24,500 के आंकड़े तक पहुंच सकता है। वहीं 23,800 के नीचे जाने पर मुनाफावसूली बढ़ सकती है।
जानिए क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20% आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत जैसे तेल उत्पादक देशों का बड़ा निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के बाजारों और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
आने वाला सप्ताह उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी और तकनीकी मजबूती बाजार को सहारा दे सकती है, लेकिन अमेरिका-ईरान वार्ता और आईटी सेक्टर की कमजोरी पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर ध्यान देना चाहिए।
संभावना यही है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य रहे तो निफ्टी 24,500 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।