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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे; जानिए 3 बड़े कारण

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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। दिन की शुरुआत सामान्य रहने के बावजूद कारोबार बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।

बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूटकर 76 हजार के स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार में कमजोरी का असर आईटी, टेक्नोलॉजी और चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों पर सबसे ज्यादा देखने को मिला।

1. ग्लोबल टेक शेयरों में भारी बिकवाली

दुनियाभर के शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी सेक्टर दबाव में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम पर पिछले कुछ महीनों में तेज उछाल देखने वाले शेयरों में अब निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स तेज गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी का संकेत मिला, जिससे वैश्विक निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

2. भारतीय आईटी शेयरों में जोरदार गिरावट

वैश्विक टेक सेक्टर की कमजोरी का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा। Infosys, Tata Consultancy Services, Wipro और HCLTech जैसे दिग्गज शेयरों में तेज बिकवाली दर्ज की गई।

निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे पूरे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ। निवेशकों को चिंता है कि वैश्विक मांग में नरमी आईटी सेक्टर की कमाई को प्रभावित कर सकती है।

3. भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता

मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम और ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक स्तर पर किसी भी भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों, मुद्रास्फीति और निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ा है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?

  • आईटी सेक्टर
  • टेक्नोलॉजी कंपनियां
  • निर्यात आधारित कंपनियां
  • हाई वैल्यूएशन वाले शेयर

वहीं कुछ रक्षात्मक सेक्टरों में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखने को मिली।

विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली का परिणाम है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लौटती है तो घरेलू बाजार में भी रिकवरी देखने को मिल सकती है।

हालांकि निवेशकों को निकट अवधि में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

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