रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अगले शैक्षणिक वर्ष से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। यह निर्णय स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में लिया गया।
16 जून नहीं, अब 1 अप्रैल से शुरू होगा सत्र
अभी तक राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू होता था, लेकिन अब इसे बदलकर 1 अप्रैल कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अप्रैल महीने में नियमित कक्षाएं संचालित होंगी और छात्रों को पाठ्यपुस्तकें व गणवेश भी इसी दौरान वितरित किए जाएंगे।
एक महीने की पढ़ाई के बाद 1 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाएगा। विद्यार्थियों को छुट्टियों के दौरान पढ़ाई जारी रखने के लिए होमवर्क भी दिया जाएगा, ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सके।
CBSE पैटर्न पर चलेगा स्टेट बोर्ड
राज्य सरकार का मानना है कि अप्रैल से सत्र शुरू होने पर विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा। यह व्यवस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पैटर्न से मेल खाती है, जहां नया सत्र पहले से ही अप्रैल में शुरू होता है।
जून अंत तक करनी होगी डेटा एंट्री
बैठक में स्कूलों और जिला शिक्षा कार्यालयों द्वारा समय पर ऑनलाइन जानकारी अपडेट नहीं करने पर नाराजगी जताई गई। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जून के अंत तक स्कूलों का पूरा डेटा पोर्टल पर अपलोड कराया जाए।
यदि निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित प्राचार्य और अधिकारियों के खिलाफ वेतन कटौती जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
VSK ऐप से अनिवार्य होगी उपस्थिति
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए VSK ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई शिक्षक ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसे अनुपस्थित माना जाएगा और वेतन कटौती की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा अवकाश के लिए आवेदन भी अब इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा।
छात्रों की बुनियादी शिक्षा पर विशेष जोर
सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को बारहखड़ी और 20 तक के पहाड़े याद कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा है। वहीं माध्यमिक स्तर के छात्रों को 25 तक के पहाड़े, हिंदी और अंग्रेजी की धाराप्रवाह पढ़ाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि बुनियादी शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार किया जा सकता है।