नई दिल्ली: इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram भारत में सात दिन बाद फिर से चालू हो गया है। NEET परीक्षा से जुड़े कथित फर्जी और लीक पेपरों के प्रसार को लेकर केंद्र सरकार ने टेलीग्राम और उससे संबंधित वेब सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। अब प्रतिबंध हटने के बाद प्लेटफॉर्म की सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।
NEET री-एग्जाम के बाद हटाया गया प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई थी। यह फैसला NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्रों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से लिया गया था।
21 जून को आयोजित री-एग्जाम के बाद प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया। इसके बाद 23 जून से एप दोबारा गूगल प्ले स्टोर पर दिखाई देने लगा, हालांकि शुरुआती घंटों में कई यूजर्स को डाउनलोड और लॉगिन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कई यूजर्स को हुई तकनीकी परेशानी
प्रतिबंध हटने के बाद भी कुछ यूजर्स ने शिकायत की कि वे एप डाउनलोड करने, साइन-अप करने या चैट एक्सेस करने में असमर्थ हैं। यह समस्या अलग-अलग नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं में देखी गई। वहीं कुछ समय तक iPhone यूजर्स के लिए भी एप उपलब्ध नहीं था।
बाद में कंपनी ने आधिकारिक जानकारी जारी कर बताया कि सेवाओं को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।
30 जून तक बंद रहेगा मैसेज एडिट फीचर
टेलीग्राम की वापसी के बावजूद सरकार ने कंपनी को 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर बंद रखने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि यूजर्स भेजे गए संदेशों में बदलाव नहीं कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस कदम से गलत सूचना या परीक्षा संबंधी सामग्री में बाद में बदलाव कर भ्रम फैलाने की संभावना कम होगी।
सरकार ने क्यों लगाया था बैन?
सरकार का आरोप था कि प्लेटफॉर्म NEET से जुड़े फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक सामग्री और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़ी गतिविधियों को रोकने में विफल रहा। इसी वजह से टेलीग्राम और उसकी वेब सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।
अधिकारियों के अनुसार री-एग्जाम के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने भी माना सरकार का फैसला सही
प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि अदालत ने सरकार के निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कोर्ट ने कंपनी की उन आपत्तियों को भी स्वीकार नहीं किया, जिनमें प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
WhatsApp और Telegram में क्या अंतर?
सरकार का कहना है कि टेलीग्राम पर बड़े पैमाने पर यूजर पहचान छिपाने और विशाल समूह बनाने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे सामग्री तेजी से वायरल हो सकती है। वहीं अन्य प्लेटफॉर्म पर निगरानी और ट्रेसबिलिटी की व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत अधिक मजबूत मानी जाती हैं।
फिलहाल टेलीग्राम की सेवाएं बहाल हो चुकी हैं, लेकिन कुछ अतिरिक्त निगरानी और प्रतिबंधात्मक शर्तें अभी भी लागू रहेंगी।