नई दिल्ली: केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक आज होने जा रही है। इससे पहले मंगलवार को हुई दो महत्वपूर्ण घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं को तेज कर दिया है। एक ओर केंद्रीय राज्य मंत्री George Kurian ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात की।
इन घटनाक्रमों के बाद माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है।
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा बना चर्चा का विषय
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार भी कर लिया।
वे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
रवनीत बिट्टू को भी नहीं मिला दोबारा मौका
हालिया राज्यसभा चुनाव में Ravneet Singh Bittu को भी दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। हालांकि वे फिलहाल मंत्री बने हुए हैं और नियमों के तहत छह महीने तक सांसद बने बिना मंत्री पद पर रह सकते हैं।
बिट्टू ने संकेत दिए हैं कि वे पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।
‘वन मैन, वन पोस्ट’ फॉर्मूला भी चर्चा में
भाजपा के भीतर ‘एक व्यक्ति-एक पद’ सिद्धांत को भी संभावित फेरबदल की वजह माना जा रहा है। हाल ही में Harsh Malhotra को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाया गया, जबकि वे केंद्र में मंत्री भी हैं। इसी तरह Pankaj Chaudhary संगठन और सरकार दोनों में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
ऐसे में कुछ नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
नए सहयोगियों को मिल सकता है मौका
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि हाल के महीनों में एनडीए के करीब आए कुछ नेताओं और सांसदों को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है।
चर्चाओं में आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर एनडीए में शामिल हुए नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2027 चुनावों पर भी नजर
विश्लेषकों का मानना है कि संभावित कैबिनेट फेरबदल के पीछे आगामी विधानसभा चुनाव भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव को देखते हुए भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
संसद में संख्या बढ़ाने की रणनीति?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भविष्य में संभावित संवैधानिक संशोधनों और बड़े विधायी एजेंडे को देखते हुए एनडीए अपने सहयोगी दलों और समर्थक सांसदों को साथ रखने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।
हालांकि फिलहाल कैबिनेट विस्तार या फेरबदल को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आज की कैबिनेट बैठक पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।