नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उस स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां वे ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने से पहले थीं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिलेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत आने में अभी कुछ महीने लग सकते हैं।
शांति वार्ता के बाद बढ़ी तेल आपूर्ति
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते तथा स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद ईरानी तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ी है।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में करीब 80 जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या अभी भी युद्ध से पहले प्रतिदिन गुजरने वाले 100 से अधिक जहाजों से कम है।
तुरंत नहीं घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा के अनुसार, फिलहाल देश में बिक रहा पेट्रोल और डीजल उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है, जिसे पहले काफी ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उस समय कच्चे तेल का भाव करीब 110 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि भारतीय रिफाइनरियों को यह और अधिक लागत पर मिला था।
रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक पहुंचने में लगता है समय
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा सस्ती दरों पर खरीदे गए कच्चे तेल को पहले स्रोत देशों से जहाजों में लोड किया जाएगा। इसके बाद भारत पहुंचने, रिफाइनिंग प्रक्रिया पूरी होने और फिर पेट्रोल पंपों तक सप्लाई होने में कुल 75 से 80 दिन का समय लग जाता है।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद खुदरा ईंधन कीमतों पर इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता।
पहले नुकसान की भरपाई कर सकती हैं कंपनियां
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर सकती हैं। साथ ही सरकार द्वारा पहले घटाई गई एक्साइज ड्यूटी का प्रभाव भी समीकरणों में शामिल रहेगा। इसलिए कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम मानी जा रही है।
दशहरे तक मिल सकती है राहत
एनर्जी एक्सपर्ट का अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत से राहत के संकेत मिल सकते हैं। वहीं दशहरे के आसपास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल कीमतें बढ़ने की आशंका कम
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहे तो तेल बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है।