बिलासपुर। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ गई है। इस बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अग्निशमन व्यवस्था की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
72.70 करोड़ रुपये के उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि प्रदेश में करीब 72.70 करोड़ रुपये के फायर सेफ्टी उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि कई जिलों में अब तक निर्माण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।
हाईकोर्ट बोला- काम धरातल पर नजर आना चाहिए
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल टेंडर प्रक्रिया का हवाला देना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को यह भी बताना होगा कि वर्क ऑर्डर जारी हुए या नहीं और वास्तविक स्तर पर कितना काम पूरा हुआ है। अदालत ने इस संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
11 जिलों में अब भी जमीन का इंतजार
सरकारी जानकारी के अनुसार गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन उपलब्ध हो चुकी है और निर्माण के लिए राशि भी जारी कर दी गई है। वहीं मुंगेली, जीपीएम, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा, नारायणपुर सहित कुल 11 जिलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन ने बनाई विशेष जांच टीमें
लखनऊ अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा जांच के लिए विशेष समितियां गठित की हैं। जिला स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में टीम बनाई गई है, जबकि प्रत्येक अनुविभाग में भी अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं।
इन समितियों को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
कोचिंग संस्थानों में मिली सुरक्षा खामियां
हाल ही में छह कोचिंग संस्थानों की जांच के दौरान कई कमियां सामने आईं। एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही गेट होने के कारण उसे सील कर दिया गया, जबकि अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
फायर ऑडिट बनेगा जांच का मुख्य आधार
प्रशासन ने माना है कि जिले में संचालित कोचिंग सेंटर, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों का समग्र रिकॉर्ड विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब जांच का मुख्य आधार फायर ऑडिट को बनाया जाएगा।
जिन संस्थानों के पास फायर एनओसी नहीं होगी या सुरक्षा मानकों में गंभीर कमी मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।