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Iran Attacks US Bases: अमेरिका पर ईरान का भीषण जवाबी हमला, IRGC का दावा- कुवैत और बहरीन में 8 सैन्य ठिकाने तबाह

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पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए कड़े अल्टीमेटम के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की कुलीन सेना ‘इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने अमेरिकी सेना के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सीधी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है।

आईआरजीसी ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिका के 8 सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन से भीषण हमला कर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है। इस अप्रत्याशित हमले के बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष-विराम (सीजफायर) की उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गई हैं।

​रात 2 से 3 बजे के बीच नेवी और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर किया हमला 
इस बेहद गोपनीय और बड़े ऑपरेशन को शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे से 3 बजे के बीच अंजाम दिया गया। इस हमले में आईआरजीसी की नेवी और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर एक साझा रणनीति के तहत काम किया। ईरान के निशाने पर मुख्य रूप से कुवैत में स्थित अमेरिका का रणनीतिक ‘अली अल सलेम एयरबेस’ और बहरीन के पोर्ट सलमान में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्य मुख्यालय शामिल था।

ईरान का दावा है कि उसकी मिसाइलों और ड्रोन ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदते हुए सीधे अपने लक्ष्यों पर सटीक प्रहार किया, जिससे वहां तैनात अमेरिकी युद्धक विमानों और संचार प्रणालियों को भारी क्षति पहुंची है।

​तटीय चौकियों पर अमेरिकी बमबारी का ‘जवाब’, सीजफायर संधि टूटी 
आईआरजीसी के कमांडरों ने इस भीषण हमले को अमेरिका की नई आक्रामकता के खिलाफ एक ‘निर्णायक जवाब’ बताया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक संदिग्ध व्यापारिक जहाज को रोकने का झूठा बहाना बनाकर ईरान के समुद्री इलाके में स्थित 5 तटीय चौकियों पर भारी बमबारी की थी। ईरान ने साफ किया कि अमेरिका का यह कदम दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए ‘इस्लामाबाद संघर्ष-विराम समझौते’ (MOU) की धारा-1 का खुला और गंभीर उल्लंघन था।

​’अब होर्मुज की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी’: पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले समझौते का हवाला 
​मिसाइल हमलों के तुरंत बाद आईआरजीसी ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट को लेकर भी एक बड़ा कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति लाइफलाइन ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ से होने वाली सभी प्रकार की कॉमर्शियल शिपिंग और जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब पूरी तरह से ईरान की है।

ईरान के मुताबिक, यह बात पाकिस्तान की मध्यस्थता से तय हुए हालिया शांति समझौते के तहत पहले ही तय हो चुकी थी। तेहरान ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में किसी भी देश या अमेरिकी जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ने का दुस्साहस किया, तो आगे से उनके साथ इससे भी कहीं ज्यादा सख्त और विनाशकारी तरीके से निपटा जाएगा।

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