सरकारी बिजली वित्त कंपनियों Power Finance Corporation (PFC) और Rural Electrification Corporation (REC) के विलय की प्रक्रिया अब आगे बढ़ गई है। दोनों कंपनियों के निदेशक मंडलों ने मर्जर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस विलय के बाद ₹11 लाख करोड़ से अधिक के लोन पोर्टफोलियो वाली भारत की सबसे बड़ी पावर सेक्टर फाइनेंस कंपनी अस्तित्व में आएगी।
यह कदम केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वित्त कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से घोषित योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
बनेगी देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी
REC के PFC में विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था होगी। यह विलय कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत किया जाएगा और विलय के बाद भी केंद्र सरकार का बहुमत स्वामित्व बरकरार रहेगा।
शेयरधारकों को कैसे मिलेंगे नए शेयर?
विलय योजना के तहत REC के प्रत्येक 100 शेयरों (₹10 अंकित मूल्य) के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर (₹10 अंकित मूल्य) दिए जाएंगे।
रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के पास REC के शेयर होंगे, वे इस शेयर विनिमय योजना के पात्र होंगे।
दशमलव शेयरों का क्या होगा?
यदि शेयरों के बंटवारे में दशमलव (Fractional Shares) बनते हैं, तो कंपनी के पास दो विकल्प होंगे—
- पूरे शेयर आवंटित करने के बाद बची हुई हिस्सेदारी की राशि बाजार मूल्य के अनुसार निवेशकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
- या सभी निवेशकों के दशमलव हिस्सों को जोड़कर पूरे शेयर बनाए जाएंगे, उन्हें बेचकर प्राप्त राशि को संबंधित निवेशकों में अनुपात के अनुसार वितरित किया जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञ लोकेश सेठिया का मानना है कि केवल मर्जर की खबर देखकर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए।
उनके अनुसार—
- मौजूदा निवेशक अपनी होल्डिंग बनाए रखें।
- यदि निवेश का नजरिया 1 से 3 वर्ष का है, तो संयुक्त कंपनी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
- लंबी अवधि में करीब 20% CAGR (Compound Annual Growth Rate) तक रिटर्न मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बिजली क्षेत्र को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विलय से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तपोषण और अधिक मजबूत होगा। साथ ही दोनों कंपनियों के संसाधनों, विशेषज्ञता और पूंजी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और विकास को गति मिलने की उम्मीद है।