रायपुर। नवा रायपुर के सेक्टर-30 में प्रस्तावित विकास परियोजना के लिए नकटी गांव में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद दर्जनों परिवार बेघर हो गए। प्रशासन ने 80 से अधिक मकानों को हटाया और प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से EWS आवास आवंटित किए हैं। हालांकि, कार्रवाई के बाद कई परिवारों ने अपने घर, पढ़ाई, रोजगार और भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
खेत बेचकर बनाया था घर, अब सब मलबे में
प्रभावित परिवारों का कहना है कि कई लोगों ने वर्षों की बचत और खेती की जमीन बेचकर मकान बनवाए थे। एक महिला ने बताया कि उनके परिवार ने करीब 50 लाख रुपये खर्च कर दो मकान बनवाए थे, लेकिन अब वे पूरी तरह टूट चुके हैं। परिवार का कहना है कि घर बनाने के लिए लिया गया कर्ज अभी भी बाकी है।
एग्जाम के बीच किताबें मलबे में दब गईं
कार्रवाई के दौरान कई छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। एक बीएससी छात्रा के परिजनों ने बताया कि उसके सेमेस्टर एग्जाम चल रहे हैं, लेकिन घर टूटने के साथ उसकी किताबें और पढ़ाई का सामान मलबे में दब गया। परिवार का कहना है कि इस स्थिति ने बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाला है।
PM आवास योजना का मकान भी टूटा
कुछ प्रभावित परिवारों का दावा है कि कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान भी शामिल थे। एक महिला ने बताया कि उन्हें योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली थी, लेकिन मकान पूरा करने के लिए अलग से कर्ज लेना पड़ा। अब घर टूटने के बाद परिवार पर कर्ज का बोझ बना हुआ है।
नई जगह से स्कूल पहुंचना बड़ी चुनौती
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित EWS आवासों में स्थानांतरित किया जा रहा है। कई छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने चिंता जताई कि नई जगह से उनके स्कूल की दूरी लगभग 20 किलोमीटर हो जाएगी, जिससे नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
बड़े परिवार, छोटा आवास
कुछ परिवारों का कहना है कि संयुक्त परिवार में 20 से अधिक सदस्य होने के बावजूद उन्हें केवल एक EWS आवास आवंटित किया गया है। उनका कहना है कि इतने छोटे मकान में पूरे परिवार का रहना और सामान रखना संभव नहीं है।
प्रशासन और प्रभावितों के अलग-अलग दावे
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की गई है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। वहीं, प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अधिक समय और बेहतर पुनर्वास की जरूरत थी। मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा जारी है।






