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भारत-अमेरिका रिश्तों पर US सांसद का बड़ा बयान: ट्रम्प की नीतियों से 30 साल में सबसे खराब हुए संबंध, टैरिफ पर भी उठाए सवाल

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वॉशिंगटन। भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के कारण दोनों देशों के रिश्ते पिछले 30 वर्षों के सबसे कठिन दौर में पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि टैरिफ नीति, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और सहयोगी देशों से पर्याप्त परामर्श के बिना लिए गए फैसलों ने आपसी भरोसे को प्रभावित किया है।

टैरिफ नीति पर जताई चिंता

यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में बोलते हुए रो खन्ना ने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीति ने मित्र देशों के बीच विश्वास को कमजोर किया है। उन्होंने दावा किया कि हालिया चीन यात्रा के दौरान एक भारतीय राजनयिक ने उनसे कहा कि इन नीतियों का असर दोनों देशों के भरोसे पर पड़ा है।

2028 चुनाव को लेकर भी किया दावा

रो खन्ना ने ट्रम्प को लेकर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी आगामी मिड-टर्म चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में भी वापसी की उम्मीद रखती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम करना होगा।

अमेरिकी राजदूत ने दिए सकारात्मक संकेत

वहीं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देश कई अहम क्षेत्रों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और जल्द इस पर महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

मोदी-ट्रम्प संबंधों का भी किया जिक्र

सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच अच्छा संवाद और आपसी विश्वास है। उनके अनुसार, मजबूत व्यक्तिगत संबंध भी द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रिश्तों पर अलग-अलग नजरिया

जहां रो खन्ना ने ट्रम्प प्रशासन की नीतियों की आलोचना की, वहीं अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बताते हुए भविष्य में सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई। इससे साफ है कि भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर विभिन्न राजनीतिक नेताओं की राय अलग-अलग हो सकती है।

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