नई दिल्ली: केंद्र की राजनीति में एक बार फिर ‘मिशन 360’ चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें हैं कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (Super Majority) के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, इन दावों पर सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का उद्देश्य भविष्य में संविधान संशोधन से जुड़े विधेयकों और बड़े सुधारों को आसान बनाना माना जा रहा है। इनमें महिला आरक्षण के क्रियान्वयन, परिसीमन, ‘एक देश-एक चुनाव’ और अन्य संवैधानिक सुधारों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया जा रहा है।
दो-तिहाई बहुमत क्यों है अहम?
भारतीय संविधान में कई महत्वपूर्ण संशोधनों के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता होती है। ऐसे में लोकसभा में पर्याप्त संख्या सरकार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है राजनीतिक चर्चा?
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा है कि एनडीए अपने सहयोगी दलों के दायरे को बढ़ाने और अन्य दलों के सांसदों का समर्थन हासिल करने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ विपक्षी दलों के सांसदों को लेकर भी कयास लगाए गए हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसी तरह यह भी कहा जा रहा है कि यदि मतदान के दौरान विपक्ष के कुछ सांसद अनुपस्थित रहते हैं, तो प्रभावी सदस्य संख्या बदलने से विशेष बहुमत का गणित प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह राजनीतिक विश्लेषण और संभावनाओं पर आधारित चर्चा है।
जिन मुद्दों को लेकर चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में जिन संभावित सुधारों को इस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, उनमें शामिल हैं—
- परिसीमन (Delimitation) के बाद लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण।
- महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया।
- एक देश-एक चुनाव (One Nation, One Election) के लिए आवश्यक संवैधानिक बदलाव।
- भविष्य में अन्य संवैधानिक एवं न्यायिक सुधारों से जुड़े प्रस्ताव।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
संवैधानिक मामलों के जानकारों का कहना है कि संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत आवश्यक होता है। किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए संसद की निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक समर्थन अनिवार्य है।
फिलहाल, ‘मिशन 360’ को लेकर सामने आ रही अधिकांश जानकारियां राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। सरकार या भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक रोडमैप सार्वजनिक नहीं किया गया है।