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पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन पर भिलाई इस्पात संयंत्र ने व्यक्त किया गहरा शोक

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भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार ने विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से अलंकृत लोककला की अप्रतिम साधिका तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की पूर्व कर्मी तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका निधन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि संपूर्ण देश की सांस्कृतिक एवं लोककलात्मक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। भिलाई के समीप स्थित गनियारी ग्राम में जन्मी तीजन बाई ने अत्यंत साधारण परिवेश से निकलकर अपनी अद्भुत प्रतिभा, अथक साधना और संघर्ष के बल पर पंडवानी जैसी समृद्ध लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपने ओजस्वी गायन, सशक्त अभिनय और विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से जीवंत स्वरूप प्रदान किया। उनकी कला ने भारतीय लोकसंस्कृति को विश्व के अनेक देशों तक पहुँचाते हुए भारत की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
तीजन बाई ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए पंडवानी की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ा और अपनी विशिष्ट कापालिक शैली की प्रस्तुति से इस लोकविधा को नई ऊर्जा एवं व्यापक स्वीकार्यता प्रदान की। वे केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सशक्त संवाहक और लोककलाओं की वैश्विक पहचान थीं।
वर्ष 1986 में वे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ीं। संयंत्र ने उनकी असाधारण प्रतिभा को सदैव सम्मान और प्रोत्साहन दिया। वर्ष 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित होने के उपरांत भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उन्हें विशेष रूप से सम्मानित करते हुए पदोन्नति एवं अन्य प्रोत्साहन प्रदान किए गए। वे सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की उन गौरवशाली कर्मियों में रहीं, जिन्होंने अपनी कला और उपलब्धियों से संयंत्र, छत्तीसगढ़ तथा पूरे भारत का नाम विश्वभर में गौरवान्वित किया।
भारत सरकार ने उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें क्रमशः पद्मश्री (1987), पद्म भूषण (2003) तथा पद्म विभूषण (2019) सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया। वे छत्तीसगढ़ की उन विरल विभूतियों में थीं, जिन्होंने भारतीय लोककला को वैश्विक सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा बनाया।
भिलाई इस्पात संयंत्र के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त कर्मी तीजन बाई के निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका संपूर्ण जीवन कला-साधना, संघर्ष, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का अनुपम उदाहरण है। उनकी अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार दिवंगत पुण्यात्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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