दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ था और यह करीब चार साल तक सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों में फंसी रही।
फिल्म को 3 जुलाई को चुपचाप OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही इसे बिना कोई स्पष्ट कारण बताए हटा दिया गया। अब फिल्म के लेखक निरेन भट्ट ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कई सवाल उठाए हैं।
‘समस्या है तो बातचीत क्यों नहीं की जाती?’
वैरायटी इंडिया से बातचीत में निरेन भट्ट ने कहा कि उन्हें लगता है कि सिस्टम में किसी को फिल्म से गंभीर समस्या है। हालांकि असली परेशानी यह है कि फिल्म निर्माताओं के साथ इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बातचीत नहीं की जा रही।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से फिल्म के मामले में केवल टालमटोल होती रही है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की तरफ से यह साफ नहीं किया गया कि फिल्म के किन हिस्सों पर आपत्ति है।
निरेन के मुताबिक, फिल्म निर्माताओं को यह भी नहीं बताया गया कि आखिर फैसले कौन ले रहा है और फिल्म में वास्तविक समस्या क्या है।
‘चुपचाप फिल्म हटाएंगे तो बातचीत कैसे होगी?’
फिल्म के लेखक ने OTT प्लेटफॉर्म के बयान पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि प्लेटफॉर्म ‘मौजूदा घटनाक्रम’ का हवाला देकर बयान जारी करता है, लेकिन यह नहीं बताता कि आखिर वे घटनाक्रम क्या हैं।
निरेन ने कहा कि अगर फिल्म को लेकर कोई समस्या है तो निर्माताओं के साथ बातचीत की जानी चाहिए। लेकिन बिना जानकारी दिए फिल्म को चुपचाप प्लेटफॉर्म से हटाना सवाल खड़े करता है।
‘द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी पर सवाल क्यों नहीं?’
निरेन भट्ट ने फिल्म को कथित तौर पर बाहरी या चरमपंथी ताकतों द्वारा गलत इस्तेमाल किए जाने की आशंका वाले तर्क पर भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने सवाल किया कि अगर ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्में बनाई और रिलीज की जा सकती हैं तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों के हाथों इस्तेमाल होने वाला हथियार क्यों नहीं बताया गया।
निरेन का कहना है कि केवल उनकी फिल्म को यह कहकर निशाना बनाना सही नहीं है कि चरमपंथी तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एक बायोपिक को रोकने के लिए दूर की आशंकाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
सुरक्षा कारणों से हटाई गई फिल्म?
मंगलवार को सामने आई एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से फिल्म को हटाए जाने के पीछे सुरक्षा कारण बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म निर्माताओं ने सुझाए गए कट्स पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था। इसके बाद फिल्म को नए नाम ‘सतलुज’ के साथ OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया।
OTT प्लेटफॉर्म सीधे CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। बताया गया कि जब मामला सरकार के संज्ञान में आया तो सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाने के लिए कहा गया।
हालांकि फिल्म निर्माताओं और लेखक ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं।
पहले ‘पंजाब 95’ था फिल्म का नाम
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ का नाम पहले ‘पंजाब 95’ रखा गया था। फिल्म लंबे समय तक सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों में फंसी रही।
बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ किया गया और इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। लेकिन रिलीज के केवल दो दिन बाद ही फिल्म प्लेटफॉर्म से हटा दी गई।
जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है फिल्म
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित बताई गई है।
फिल्म की कहानी 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों लोगों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों की जांच के लिए खालरा के संघर्ष को दिखाती है।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है।
फिल्म में नजर आए ये कलाकार
‘सतलुज’ में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान अहम भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की कहानी निरेन भट्ट ने उत्सव मैत्रा और निर्देशक हनी त्रेहान के साथ मिलकर लिखी है।
OTT से हटाए जाने के बाद ‘सतलुज’ को लेकर विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। फिल्म के लेखक ने पारदर्शिता और बातचीत की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर उनकी फिल्म को ही बाहरी ताकतों द्वारा गलत इस्तेमाल किए जाने की आशंका के आधार पर क्यों निशाना बनाया जा रहा है।