सुकमा – जिला अस्पताल की अटल आरोग्य लैब में मरीजों की रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने के बाद लाइफ केयर लिमिटेड ने अपनी जांच में कर्मचारियों की गलती स्वीकार कर ली है। शहर निवासी ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी। पिछले 13 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अटल लैब का शुभारंभ किया था, इससे नागरिकों में उत्साह था। लेकिन शुभारंभके महज दो दिन बाद जिला अस्पताल में इसकी पोल खुल गई, जब मरीज के ब्लड जांच में ही गलत जानकारी दे दी गई।
सुकमा निवासी राठी परिवार ने अपने पिता के ब्लड जांच की मुख्यमंत्री से की गई शिकायत के बाद जारी स्पष्टीकरण में कंपनी ने माना है। जारी स्पष्टीकरण में कंपनी ने माना है कि डेटा एंट्री के दौरान टाइपिंग त्रुटि के कारण मरीज की उम्र और लिंग गलत दर्ज हो गया था। हालांकि इतनी गंभीर चूक के बावजूद संबंधित कर्मचारियों पर किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बजाय केवल काउंसलिंग और समझाइश दिए जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
काउंसलिंग तक कार्रवाई सीमित क्यों?
अब बड़ा सवाल यह है कि जब कंपनी स्वयं कर्मचारियों की चूक स्वीकार कर रही है, तो फिर केवल काउंसलिंग तक कार्रवाई सीमित क्यों रखी गई। क्या इससे भविष्य में लापरवाही पर अंकुश लग पाएगा या फिर मरीजों की जान से जुड़े मामलों में भी जवाबदेही सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
काउंसलिंग के बाद कड़ाई के निर्देश
पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित कर्मचारियों की काउंसलिंग की गई तथा भविष्य में ऐसी गलती न हो इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि किसी मरीज की मेडिकल रिपोर्ट में उम्र और लिंग जैसी मूलभूत जानकारी गलत दर्ज हो सकती है, तो इसका असर उपचार और चिकित्सकीय निर्णयों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में क्या केवल समझाइश देकर मामले को समाप्त करना पर्याप्त माना जा सकता है।
उम्र 80 को बताया 30 और पुरुष को बना दिया महिला
एचएलएल ने 19 जून 2026 को जारी पत्र में बताया है कि, जांच के दौरान पाया गया कि पंजीयन प्रक्रिया के समय मरीज की जानकारी दर्ज करते हुए मानवीय त्रुटि हुई। रिपोर्ट में 80 वर्ष के मरीज की उम्र 30 वर्ष दर्ज कर दी गई, वहीं पुरुष के स्थान पर महिला दर्ज कर दिया गया। कंपनी ने इसे टाइपोग्राफिकल एरर और अस्थायी सिस्टम संबंधी समस्या बताया है।