पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष और गाजा में बिगड़ते मानवीय हालातों के बीच इजरायल को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अपने सबसे मजबूत सहयोगी देश अमेरिका से एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की ओर से इजरायल को दी जाने वाली सालाना 3.3 अरब डॉलर (लगभग ₹27,000 करोड़) की सैन्य सहायता राशि को लेकर अमेरिकी संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ में गंभीर मतभेद और खींचतान खुलकर सामने आ गए हैं।
अमेरिकी संसद के आधे से ज्यादा सत्ताधारी डेमोक्रेटिक सांसदों ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आक्रामक सैन्य नीतियों का कड़ा विरोध करते हुए इस भारी-भरकम सहायता राशि में तत्काल रूप से बड़ी कटौती करने या इसे पूरी तरह से रोकने के पक्ष में मतदान किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक पर हुआ ऐतिहासिक मतदान; प्रस्ताव के विरोध में पड़े 314 वोट
अमेरिकी संसद के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर बुधवार को एक विशेष संशोधन प्रस्ताव पर ऐतिहासिक मतदान कराया गया। यह संशोधन प्रस्ताव अमेरिका के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक’ में इजरायल को दी जाने वाली बिना शर्त सैन्य मदद को पूरी तरह रोकने के उद्देश्य से लाया गया था। हालांकि, अंतिम परिणाम की बात करें तो यह प्रस्ताव सदन में गिर गया; क्योंकि प्रस्ताव के पक्ष में मात्र 104 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 314 सांसदों ने एकजुट होकर मतदान किया।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही यह संशोधन राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक में जुड़ने से रह गया हो, लेकिन इस वोटिंग ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की युद्ध रणनीति और गाजा नीति को लेकर अमेरिकी संसद और खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर बहुत गहरी और वैचारिक दरार आ चुकी है।
अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले बगावत; 100 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने किया फंड रोकने का समर्थन
यह हाई-प्रोफाइल वोटिंग अमेरिका में होने वाले आगामी मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले हुई है, जो यह तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर आने वाले समय में किस पार्टी का राजनीतिक नियंत्रण होगा। इस महत्वपूर्ण मतदान के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व और उनके सांसदों के बीच के आंतरिक मतभेद पूरी तरह से जनता के सामने आ गए। पार्टी के 100 से अधिक प्रभावशाली डेमोक्रेटिक सांसदों ने इजरायल को दी जाने वाली विदेशी सैन्य सहायता राशि को पूरी तरह खत्म करने वाले इस कड़े संशोधन के पक्ष में अपना वोट डाला, जबकि लगभग इतने ही अन्य डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसके खिलाफ जाकर मतदान किया।