Meta Pixel

ई-20 पेट्रोल से कार का इंजन खराब : आयोग के फैसले को चुनौती देगी मारुति कंपनी

Spread the love

रायपुर। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (रायपुर) के उस आदेश को अदालत में चूनौती देगी, जिसमें कंपनी को एक ग्राहक के वाहन को 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) अनुकूल वाहन से बदलने का निर्देश दिया गया है। कंपनी ने इसके लिए ईंधन में मिलावट का हवाला दिया है।

मारुति सुजुकी इंडिया ने बयान में कहा कि, इस मामले में शामिल कार पूरी तरह से ई-20 अनुकूल थी और ग्राहक के वाहन से निकाले गए ईंधन में मिलावट के सबूत मिले हैं। कंपनी ने कहा, हमें जिला उपभोक्ता फोरम के एक आदेश की जानकारी मिली है, जिसमें मारुति सुजुकी को ग्राहक के वाहन को एक नए ई-20 अनुकूल वाहन से बदलने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी में मारुति सुजुकी
मारुति सुजुकी इंडिया ने कहा कि, इस मामले में कार ई-20 अनुकूल थी, जो ई-20 ईंधन पर चलने के लिए पूरी तरह सक्षम है। कंपनी ने दावा किया, ग्राहक के वाहन से एकत्र किए गए ईंधन में मिलावट के स्पष्ट सबूत हैं। इसके अलावा कई अन्य प्रासंगिक तथ्यों को भी आदेश में शामिल नहीं किया गया है। बयान में कहा गया, मारुति सुजुकी कानून के अनुसार, उचित उच्च मंच के समक्ष इस विवादित आदेश को चुनौती देने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। कंपनी ने कहा कि वह मजबूत इंजीनियरिंग, प्रक्रियाओं और प्रणालियों के माध्यम से गुणवत्ता, सुरक्षा तथा ग्राहक संतुष्टि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

यह है पूरा मामला
कचना निवासी डॉ. देवराज देवता ने तीन जून 2024 को कार खरीदी थी। कार में ई-20 मिश्रित पेट्रोल डालने की वजह से कार का इंजन खराब हो गया। इसके बाद डॉक्टर ने इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम में दर्ज कराई। फोरम ने 14 जुलाई 2026 को उपीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि यदि कंपनी 45 दिनों के अंदर नई ई-20 अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की कीमत 20.5 लाख रुपए, आरटीओ पंजीकरण, बीमा और बाकी खर्चों सहित पूरी राशि लौटानी होगी। मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपए और केस लड़ने के 10 हजार रुपए भी अदा करने होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *