भारत में जल्द ही कागज के नोटों की जगह आधुनिक पॉलीमर (प्लास्टिक) नोट देखने को मिल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इसके लिए तकनीकी सहयोग और उत्पादन साझेदारों की तलाश शुरू कर दी है। शुरुआती चरण में 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट जारी करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक के नोट?
मौजूदा कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और बार-बार बदलने पड़ते हैं। इसके मुकाबले पॉलीमर नोट अधिक मजबूत, लंबे समय तक टिकने वाले और पानी व नमी से प्रभावित नहीं होते। इन पर धूल-मिट्टी भी कम जमती है और इन्हें साफ रखना आसान होता है। यही वजह है कि दुनिया के 60 से अधिक देशों में पहले से पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारत में ही होगा निर्माण
इस नई पहल के तहत BRBNMPL ने ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI)’ जारी किया है, ताकि ऐसे तकनीकी साझेदारों की पहचान की जा सके जो सिक्योरिटी-ग्रेड पॉलीमर सब्सट्रेट बनाने में सक्षम हों। यही वह विशेष प्लास्टिक सामग्री है, जिस पर नोटों की छपाई की जाती है।
आरबीआई की मंशा केवल विदेशों से सामग्री मंगाने की नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारत में ही पॉलीमर सब्सट्रेट का उत्पादन शुरू करने की है, जिससे देश इस तकनीक में आत्मनिर्भर बन सके।
तकनीकी सहयोगियों की तलाश
17 जुलाई को जारी EOI के माध्यम से ऐसे विशेषज्ञों और कंपनियों को आमंत्रित किया गया है, जिनके पास सुरक्षा मानकों के अनुरूप पॉलीमर सब्सट्रेट विकसित करने का अनुभव हो। यह प्रक्रिया किसी खरीद आदेश के लिए नहीं, बल्कि संभावित तकनीकी साझेदारों की पहचान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
करेंसी व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव
यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भारतीय मुद्रा प्रणाली में यह पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव माना जाएगा। पॉलीमर नोट न केवल अधिक टिकाऊ होंगे, बल्कि उनकी सुरक्षा विशेषताएं भी बेहतर होंगी, जिससे नकली नोटों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। शुरुआती दौर में ₹10 और ₹20 के नोटों से इसकी शुरुआत होने की संभावना है, जिसके बाद अन्य मूल्यवर्ग के नोटों पर भी विचार किया जा सकता है।