महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किए जाने के बाद जांच में नए दावे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस पर कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल कर ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। फिलहाल भारतीय और ओमानी एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
फर्जी पासपोर्ट को लेकर क्या दावा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित पासपोर्ट पर फोटो सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि उसमें दर्ज नाम “Ajanta Mendis” है, जो श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता है।
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
अलग-अलग दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि
जांच से जुड़े दावों के अनुसार, कथित फर्जी पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है। एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि क्या अलग पहचान और अलग जन्मतिथि का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई या प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से किया गया था।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
जांच अधिकारियों के मुताबिक, यदि फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो ओमान में पहले उस मामले से संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।
भारत सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां भारत-ओमान प्रत्यर्पण संधि के तहत सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।
2023 से एजेंसियों की तलाश में
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सौरभ चंद्राकर लंबे समय से जांच के दायरे में है। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
ED का आरोप है कि ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध वित्तीय लेनदेन किए गए। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अजन्ता मेंडिस कौन हैं?
अजन्ता मेंडिस श्रीलंका के पूर्व अंतरराष्ट्रीय स्पिन गेंदबाज हैं, जिन्हें उनकी रहस्यमयी स्पिन गेंदबाजी के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर में टेस्ट, वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में श्रीलंका का प्रतिनिधित्व किया और कई यादगार प्रदर्शन किए।
नोट: इस मामले में जांच अभी जारी है। सौरभ चंद्राकर पर लगे आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।