नई दिल्ली। NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार की ओर से संवाद की पहल होती दिखाई दे रही है। 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक से मंगलवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर मुलाकात की।
दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने डॉक्टरों से वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह करते हुए भरोसा दिलाया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। इस मुलाकात को सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हाई कोर्ट के निर्देश पर मेदांता अस्पताल में भर्ती
लगातार 19 दिनों तक अनशन करने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने बेहतर इलाज की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर उन्हें मंगलवार शाम कड़ी सुरक्षा और मेडिकल टीम की निगरानी में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनका इलाज कर रही है।
NEET मामले को लेकर जारी है आंदोलन
सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा प्रभावित छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।
आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
सरकार ने जताई बातचीत की इच्छा
मेदांता अस्पताल में हुई मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और अनशन समाप्त करने की अपील की। सूत्रों के अनुसार, सरकार छात्रों की चिंताओं पर चर्चा के लिए सकारात्मक रुख रखती है और जल्द ही आंदोलन के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।
यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है, तो लंबे समय से जारी यह आंदोलन समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।