अडाणी ग्रुप ने उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रही है। समूह ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि एयरलाइन बिजनेस में उतरने की फिलहाल कोई योजना नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह निराधार हैं।
क्या था पूरा मामला?
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अडाणी ग्रुप भारत के एविएशन सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नई एयरलाइन लॉन्च करना चाहता है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन कारोबार से जुड़े क्रॉस-ओनरशिप नियमों में बदलाव की मांग कर रही है।
अडाणी ग्रुप ने क्या कहा?
कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि एयरलाइन शुरू करने से जुड़ी सभी खबरें गलत हैं। ग्रुप ने साफ किया कि फिलहाल वह एयरलाइन संचालन के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है।
क्रॉस-ओनरशिप नियम को लेकर क्या चर्चा थी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइन कंपनियों के बीच क्रॉस-ओनरशिप नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है।
मौजूदा नियमों के अनुसार, कोई भी एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकता। चर्चा थी कि इस सीमा को हटाने या आसान बनाने पर विचार किया जा रहा है।
पहले भी एयरलाइन बिजनेस से दूरी बना चुका है ग्रुप
अडाणी ग्रुप के एविएशन कारोबार से जुड़े जीत अडाणी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि एयरलाइन संचालन उनके बिजनेस मॉडल का हिस्सा नहीं है। उनका कहना था कि समूह का मुख्य फोकस एयरपोर्ट और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर है, जबकि एयरलाइन कारोबार अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाला क्षेत्र है।
एविएशन सेक्टर में किस पर रहेगा फोकस?
एयरलाइन शुरू करने की योजना से इनकार करने के बावजूद अडाणी ग्रुप एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी मौजूदगी मजबूत बनाए रखेगा।
वर्तमान में समूह—
- देश के 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स का संचालन करता है।
- ग्राउंड हैंडलिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉल) सेवाओं में सक्रिय है।
- पायलट ट्रेनिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।
- ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के साथ मिलकर भारत में पैसेंजर जेट निर्माण की संभावनाओं पर भी कार्य कर रहा है।
सरकार क्यों कर रही है नियमों पर विचार?
भारतीय घरेलू विमानन बाजार में फिलहाल इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है। दोनों कंपनियां मिलकर बाजार का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती हैं। ऐसे में सरकार प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से क्रॉस-ओनरशिप नियमों की समीक्षा कर रही है।
हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।